नई दिल्ली। WhatsApp Privacy Policy को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मेटा प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप एलएलसी पर बेहद सख्त रुख अपनाया। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय नागरिकों के निजी डेटा का किसी भी तरह से शोषण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह टिप्पणी उस समय आई जब कोर्ट, मेटा और व्हाट्सएप द्वारा दायर उन अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें Competition Commission of India (CCI) द्वारा 2021 की व्हाट्सएप प्राइवेसी पॉलिसी पर लगाए गए ₹213.14 करोड़ के जुर्माने को चुनौती दी गई है। इस जुर्माने को पहले NCLAT ने बरकरार रखा था।
⚖️ “एकाधिकार में विकल्प कैसा?” – CJI का तीखा सवाल
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जब व्हाट्सएप का बाज़ार में एकाधिकार है, तो उपभोक्ता को दिया गया “विकल्प” केवल दिखावा है।
उन्होंने टिप्पणी की—
“या तो आप व्हाट्सएप की शर्तें मानें, या फिर प्लेटफॉर्म छोड़ दें—यह कोई विकल्प नहीं है।”
CJI ने यहां तक कहा कि यदि मेटा और व्हाट्सएप यह शपथपत्र नहीं देते कि वे यूज़र्स के निजी डेटा का उपयोग नहीं करेंगे, तो अदालत अपील सुनने से भी इनकार कर सकती है।
👩🌾 “क्या आम नागरिक नीति समझ सकता है?”
अदालत ने व्हाट्सएप की जटिल भाषा वाली नीति पर भी सवाल उठाए।
CJI सूर्यकांत ने मानवीय उदाहरण देते हुए कहा—
“क्या सड़क पर फल बेचने वाली महिला, या घरेलू सहायिका, आपकी प्राइवेसी पॉलिसी समझ पाएगी? यह निजी जानकारी की ‘सभ्य चोरी’ जैसा है।”
इस टिप्पणी ने सुनवाई को केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय मुद्दा बना दिया।
📊 डेटा का मूल्य और विज्ञापन से कमाई पर सवाल
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने डेटा की आर्थिक कीमत पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि Digital Personal Data Protection Act, 2023 केवल गोपनीयता की बात करता है, लेकिन डेटा के व्यावसायिक मूल्य को नहीं आंकता।
उन्होंने पूछा—
“अगर किसी व्यक्ति के डिजिटल व्यवहार से विज्ञापन कमाया जा रहा है, तो उस डेटा का मूल्य किसे मिल रहा है?”
यह सवाल सीधे तौर पर मेटा के टार्गेटेड एडवर्टाइजिंग मॉडल पर था।
🔐 व्हाट्सएप का पक्ष: “मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं”
मेटा और व्हाट्सएप की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि व्हाट्सएप संदेश end-to-end encrypted होते हैं और कंपनी उन्हें नहीं पढ़ सकती।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला केवल संदेश पढ़ने का नहीं, बल्कि व्यवहारिक डेटा, ट्रेंड और डिजिटल फुटप्रिंट्स के उपयोग का है।
📌 आगे क्या?
- सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि बिना ठोस आश्वासन के राहत संभव नहीं
- डेटा के मूल्य और लाभ-साझेदारी पर भविष्य में व्यापक बहस तय
- डिजिटल कंपनियों के लिए भारत में नया न्यायिक मानक स्थापित होने के संकेत
यह मामला न सिर्फ टेक कंपनियों के लिए चेतावनी है, बल्कि हर भारतीय नागरिक के डिजिटल अधिकारों से जुड़ा अहम मोड़ भी है।
