Pariyana Divyang School visit: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 31 जनवरी को नारायणपुर जिले के गरांजी स्थित परियाना दिव्यांग आवासीय विद्यालय का आकस्मिक दौरा किया और बच्चों के साथ समय बिताकर उनकी समस्याओं व आकांक्षाओं को समझा।
जैसे ही मुख्यमंत्री पहुँचे, विद्यालय के विशेष बच्चों ने उन्हें हार्दिक स्वागत गीत, हनुमान चालीसा और बस्तर क्षेत्र के लोक गीतों की मधुर प्रस्तुतियां दी। बच्चों की प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावविभोर कर दिया।
बच्चों की सुविधा के लिए स्कूल को बस की सौगात
बच्चों द्वारा की गई एक विशेष अनुरोध पर मुख्यमंत्री ने स्कूल के लिए बस उपलब्ध कराने की घोषणा की, जिससे छात्रों की आवागमन और दैनिक जरूरतों में सुविधा होगी।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि जीवन में संकल्प, समर्पण और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे IAS, IPS जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए भी प्रयास करें। उनका कहना था कि शारीरिक चुनौतियां कभी निराशा का कारण नहीं बननी चाहिए, क्योंकि दिव्यांग व्यक्ति में अद्वितीय क्षमता निहित होती है।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को दिए आशीर्वाद और चॉकलेट
मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों में चॉकलेट वितरित की और उन्हें आशीर्वाद दिए। इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, सचिव श्री राहुल भगत, कमिश्नर श्री डोमन सिंह और IG श्री सुंदरराज पी भी उपस्थित थे।
विद्यालय का उद्देश्य और सुविधाएं
परियाना दिव्यांग आवासीय विद्यालय का 11 सितंबर 2023 को उद्घाटन हुआ था और यह जिला मिनरल ट्रस्ट फंड के सहयोग से संचालित हो रहा है।
इस विद्यालय का प्रमुख उद्देश्य है—
- विशेष बच्चों को समावेशी शिक्षा प्रदान करना
- उन्हें समाज के मुख्यधारा से जोड़ना
- आत्मविश्वास बढ़ाना और सामाजिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने में सक्षम बनाना
वर्तमान में विद्यालय में 60 छात्र अध्ययनरत हैं। स्कूल में छात्रों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में शामिल हैं—
- ऑडियोलॉजी
- फिजियोथेरेपी
- विशेष शिक्षा
- संगीत शिक्षा
- खेलकूद और योग
- कंप्यूटर शिक्षा
मुख्यमंत्री के विचार और अनुभव
मुख्यमंत्री ने बताया कि बच्चों के साथ समय बिताने का अनुभव अत्यंत प्रेरणादायक रहा। एक छात्रा के सवाल पर उन्होंने साझा किया कि बचपन में पिट्ठू और फुटबॉल खेलना उन्हें बहुत पसंद था।
इस प्रकार, मुख्यमंत्री की यह आकस्मिक यात्रा दिव्यांग छात्रों के लिए आत्मविश्वास और प्रोत्साहन का प्रतीक बन गई।
