गांधी पुण्यतिथि पर शराब दुकानें खुली रहने के फैसले का विरोध, दुर्ग में कांग्रेस का आबकारी विभाग घेराव

दुर्ग: गांधी पुण्यतिथि पर फैसले को लेकर सड़कों पर उतरी कांग्रेस

liquor shop protest: छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शराब दुकानों को खुला रखने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
दुर्ग शहर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला आबकारी विभाग का घेराव किया और राज्य सरकार के निर्णय को गांधी के आदर्शों के खिलाफ बताया।


“इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ” – अय्यूब खान

घेराव प्रदर्शन में शामिल छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव अय्यूब खान ने कहा कि
इस वर्ष पहली बार ऐसा निर्णय लिया गया है, जब गांधी जी की पुण्यतिथि पर शराब दुकानें बंद नहीं की गईं।

उन्होंने कहा,

“भाजपा गांधी जी की तस्वीर लगाकर शराबबंदी की बात करती है, लेकिन गांधी जी की पुण्यतिथि पर शराब दुकानें खुली रखना बेहद निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।”


कांग्रेस ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि गांधी जी के विचारों के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

नेताओं ने कहा कि
महात्मा गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा हैं।
उनके शहादत दिवस पर संवेदनशीलता दिखाना हर सरकार का नैतिक दायित्व होता है।


“गांधी के आदर्शों का अपमान”

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि
गांधी जी का जीवन सत्य, संयम और अहिंसा का प्रतीक था।
ऐसे दिन ड्राय डे घोषित न करना, गांधी जी के बलिदान और आदर्शों का अपमान है।

इसी कारण Gandhi Punyatithi liquor shop protest को लेकर कांग्रेस ने खुलकर सरकार का विरोध किया।


सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग

कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह इस निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार करे और
भविष्य में राष्ट्रीय महत्व के दिनों पर गरिमा और परंपरा का पालन सुनिश्चित करे।


बड़ी संख्या में कांग्रेसजन रहे मौजूद

इस घेराव प्रदर्शन में प्रमुख रूप से—

  • शहर कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल
  • प्रदेश सचिव अय्यूब खान
  • नेता प्रतिपक्ष संजय कोहले
  • ब्लॉक अध्यक्ष मनीष बघेल
  • पार्षद, मंडल अध्यक्ष और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता

उपस्थित रहे। प्रदर्शन में महिलाओं और युवाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही।


राजनीतिक संदेश भी साफ

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ शराब दुकानों का मुद्दा नहीं, बल्कि
राष्ट्रीय मूल्यों और ऐतिहासिक परंपराओं की रक्षा का सवाल है।

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