राजस्थान और छत्तीसगढ़ में BJP सरकार की विफलताओं को उजागर करने पर कांग्रेस का जोर

Congress Strategy Meeting 2026: कांग्रेस नेतृत्व ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ के पार्टी नेताओं के साथ अलग-अलग रणनीतिक बैठकें कीं। इन बैठकों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकारों की विफलताओं को जनता के सामने प्रभावी ढंग से रखने और जमीनी स्तर पर संगठन को धार देने पर विशेष जोर दिया गया।

इन बैठकों की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की। बैठक में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और एआईसीसी महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल भी मौजूद रहे।


राजस्थान में संगठन, चुनाव और जनआंदोलनों पर चर्चा

राजस्थान से जुड़े नेताओं की बैठक मल्लिकार्जुन खड़गे के निवास पर हुई। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधानसभा दल के नेता टीकाराम जूली, एआईसीसी महासचिव सचिन पायलट और भंवर जितेंद्र सिंह, तथा पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा शामिल हुए।

बैठक के बाद गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि चर्चा का केंद्र संगठनात्मक मजबूती रहा।
उन्होंने कहा कि—

  • बूथ स्तर पर एजेंटों की नियुक्ति
  • मनरेगा (MGNREGA) को बहाल कराने का आंदोलन
  • मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) के अंतिम चरण में कथित अनियमितताएं
  • आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों की तैयारियां

इन सभी विषयों पर विस्तार से विचार किया गया।

डोटासरा के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी नेताओं को एकजुट रहकर वंचित और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाने का संदेश दिया, ताकि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को और मजबूत किया जा सके।

“शीर्ष नेतृत्व का स्पष्ट संदेश है कि हम एकजुट होकर जनता से जुड़े मुद्दों और सरकार के भेदभाव के खिलाफ लगातार संघर्ष करें,”
— गोविंद सिंह डोटासरा


छत्तीसगढ़ में आदिवासी अधिकार और पंचायतों का मुद्दा

छत्तीसगढ़ से जुड़े नेताओं की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सहित वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

इस बैठक में सचिन पायलट ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आदिवासी अधिकारों को कमजोर कर रही है और मनरेगा को खत्म कर एक नया रोजगार कानून लागू कर पंचायतों की ताकत छीन रही है।

पायलट ने कहा—

“छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार पूरी तरह विफल रही है। बैकडोर से खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे हमारे आदिवासी भाई-बहन परेशान हैं। कांग्रेस मजबूती से उनके साथ खड़ी है।”

उन्होंने आगे कहा कि—

“मनरेगा को समाप्त कर नया कानून लाकर पंचायतों, गरीबों और मजदूरों के अधिकार छीने गए हैं। कांग्रेस इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बनाएगी और यह कानून वापस कराने तक संघर्ष जारी रहेगा।”


2028 की तैयारी और जमीनी संघर्ष पर फोकस

इन बैठकों से साफ है कि कांग्रेस अब Congress Strategy Meeting 2026 के जरिए राज्यों में संगठन को फिर से सक्रिय करना चाहती है।
पार्टी का फोकस भाजपा सरकारों की नीतियों से प्रभावित किसानों, मजदूरों, आदिवासियों और कमजोर वर्गों के मुद्दों को केंद्र में रखकर जनआंदोलन तेज करने पर है।

राजस्थान और छत्तीसगढ़ में यह रणनीति आने वाले चुनावी मुकाबलों में कांग्रेस की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *