छत्तीसगढ़ पर्यटन को उद्योग का दर्जा: 500 करोड़ निवेश, फिल्म सिटी, भोरमदेव कॉरिडोर और 500 होम-स्टे का रोडमैप

Chhattisgarh Tourism Industry Status: छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने बीते दो वर्षों में प्रदेश को पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के क्षेत्र में नई दिशा दी है। नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पर्यटन सचिव डॉ. रोहित यादव और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने विभागीय उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजनाओं का विस्तार से विवरण दिया।

अधिकारियों ने बताया कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर सरकार ने आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक संरक्षण का एक समन्वित मॉडल स्थापित किया है।


पर्यटन को मिला उद्योग का दर्जा, निवेश को मिली रफ्तार

Chhattisgarh Tourism Industry Status मिलने के बाद राज्य में निजी निवेश के नए अवसर खुले हैं। इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के जरिए 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश सुनिश्चित किया गया है। इससे होटल, रिसॉर्ट, साहसिक और ग्रामीण पर्यटन को मजबूती मिली है।

साथ ही, रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत IRCTC के सहयोग से वर्ष 2024-25 में 42,500 से अधिक श्रद्धालुओं को विशेष ट्रेनों से अयोध्या दर्शन कराया गया, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई पहचान मिली।


होम-स्टे नीति 2025-30: गांवों में पर्यटन, लोगों को रोजगार

ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने छत्तीसगढ़ होम-स्टे नीति 2025-30 लागू की है।

  • 500 नए होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य
  • पूंजी निवेश और ब्याज पर सब्सिडी
  • स्थानीय समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा

यह नीति गांवों में आत्मनिर्भरता और आजीविका का मजबूत आधार बनेगी।


350 करोड़ की फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर

डॉ. रोहित यादव ने बताया कि भारत सरकार की SASCI योजना के तहत 350 करोड़ रुपये की लागत से चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर को मंजूरी मिली है।
इस परियोजना का भूमिपूजन 24 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया।

यह पहल छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करेगी और युवाओं, कलाकारों व रचनात्मक उद्योगों को नया मंच देगी।


भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर: आस्था और विरासत का संगम

स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत 146 करोड़ रुपये की लागत से भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है।
यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर बनाई जा रही है।

करीब 1000 वर्ष पुराना भोरमदेव मंदिर आने वाले हजार वर्षों तक संरक्षित रहे—यही इस परियोजना का उद्देश्य है।
इसका भूमिपूजन 1 जनवरी 2026 को केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र शेखावत और मुख्यमंत्री श्री साय ने किया।


सिरपुर, मयाली-बगीचा और चित्रकोट पर फोकस

  • मयाली-बगीचा सर्किट (जशपुर): 10 करोड़ की स्वीकृति
  • सिरपुर एकीकृत विकास: विश्व धरोहर स्थल बनाने की दिशा में मास्टर प्लान
  • चित्रकोट ग्लोबल डेस्टिनेशन: 250 करोड़ की प्रस्तावित योजना
  • चित्रकोट में टेंट सिटी और साहसिक पर्यटन का विकास

देश-विदेश में छत्तीसगढ़ पर्यटन का प्रचार

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने स्पेन, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन आयोजनों में भाग लिया।
फिक्की और यूनिवर्सल ट्रैवल कॉन्क्लेव जैसे मंचों पर सहभागिता से राज्य को वैश्विक पहचान मिली।


पर्यटन व्यवसायों में रिकॉर्ड वृद्धि

  • टूर/ट्रैवल ऑपरेटर: 30 से बढ़कर 300+
  • पर्यटन मंडल का लाभ
    • 2024-25: 2 करोड़
    • 2025-26: 10 करोड़

यह वृद्धि बेहतर प्रबंधन और रणनीतिक फैसलों का परिणाम है।


संस्कृति विभाग: कलाकारों के साथ हर सुख-दुख में

संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग द्वारा चिन्हारी पोर्टल पर कलाकारों और साहित्यकारों का पंजीयन किया जा रहा है।

  • पेंशन सहायता: 65 लाख से अधिक
  • कलाकार कल्याण कोष: बीमारी, दुर्घटना और मृत्यु पर आर्थिक सहयोग

बस्तर पंडुम 2026: जनजातीय संस्कृति का उत्सव

10 जनवरी से 9 फरवरी 2026 तक आयोजित बस्तर पंडुम में जनजातीय नृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और वन-आधारित ज्ञान को राष्ट्रीय मंच मिलेगा।


रीवांगढ़ उत्खनन से इतिहास की नई परतें

रीवांगढ़ (रीवां) में हुए उत्खनन से यह प्रमाणित हुआ है कि छत्तीसगढ़ में 800 ईसा पूर्व से पहले मानव सभ्यता विकसित हो चुकी थी।
यह खोज प्रदेश के इतिहास को नई पहचान देती है।


छत्तीसगढ़ सरकार की पर्यटन और संस्कृति नीति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास, विरासत और रोजगार—तीनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं। Chhattisgarh Tourism Industry Status प्रदेश को आने वाले वर्षों में आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला है।

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