रायपुर।
Police Commissionerate System: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव लागू कर दिया गया है। अब शहर में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम प्रभावी हो गया है, जिसके तहत कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट के कई अधिकार पुलिस आयुक्त को सौंप दिए गए हैं।
23 जनवरी से IPS अधिकारी संजीव शुक्ला ने रायपुर के पहले पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है।
सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से कानून व्यवस्था मजबूत होगी, अपराध नियंत्रण तेज होगा और संवेदनशील मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया सरल होगी। हालांकि, इसके साथ ही प्रशासनिक संतुलन और जवाबदेही को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।
क्या है पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम और क्यों लागू हुआ?
तेजी से बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव और अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए सरकार का मानना है कि रायपुर जैसे महानगर में त्वरित निर्णय लेने वाली पुलिस व्यवस्था की जरूरत थी।
इस सिस्टम के तहत फाइलों को विभागों के बीच घुमाने की प्रक्रिया खत्म होगी और पुलिस सीधे कार्रवाई कर सकेगी।
पुलिस आयुक्त को मिले ये अहम अधिकार
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, रायपुर पुलिस आयुक्त को—
- BNSS की धारा 14 और 15 के तहत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के अधिकार
- धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करने का अधिकार
- भीड़ और दंगा नियंत्रण के लिए सीधे आदेश जारी करने की शक्ति
- धारा 59-143 और 148-151 के तहत त्वरित कार्रवाई की अनुमति
इसके अलावा पुलिस आयुक्त अब सीधे इन कानूनों के तहत भी कार्रवाई कर सकेंगे—
- Chhattisgarh Police Act, 2007
- Prisoners Act, 1900
- Motor Vehicles Act, 1988
- Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956
- Unlawful Activities (Prevention) Act
- Official Secrets Act
- Chhattisgarh State Security Act, 1990
अतिरिक्त और सहायक पुलिस आयुक्तों को भी अपने क्षेत्रों में कार्यपालक मजिस्ट्रेट के अधिकार दिए गए हैं।
आम लोगों को क्या फायदा मिलेगा?
सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था से—
- अपराधियों पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी
- पेट्रोलिंग और ट्रैफिक व्यवस्था मजबूत होगी
- VIP मूवमेंट और बड़े आयोजनों में बेहतर नियंत्रण रहेगा
- पुलिस को अनुमति के लिए बार-बार प्रशासन के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे
यदि जमीन पर सही ढंग से लागू हुआ, तो यह व्यवस्था जनता का भरोसा कानून व्यवस्था पर और मजबूत कर सकती है।
केंद्रीकरण बनाम संतुलन, उठे सवाल
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मजिस्ट्रेटी अधिकार पुलिस को देने से सत्ता का केंद्रीकरण हो सकता है।
यह भी आशंका जताई जा रही है कि पुलिस और सिविल प्रशासन के बीच अधिकारों का टकराव पैदा हो सकता है।
पहले पुलिस आयुक्त संजीव शुक्ला का फोकस
कार्यभार संभालने के बाद पुलिस आयुक्त संजीव शुक्ला ने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य लक्ष्य—
- अपराध नियंत्रण
- अपराधियों पर सख्त कार्रवाई
- ट्रैफिक व्यवस्था सुधार
- ‘बेसिक पुलिसिंग’ को मजबूत करना
उन्होंने कहा कि पुलिस की मूल जिम्मेदारियों को और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों की राय: फायदे भी, सवाल भी
वरिष्ठ अधिवक्ता फैसल रिजवी का मानना है कि बड़े शहरों में यह व्यवस्था जरूरी है और समय के साथ इसके सकारात्मक परिणाम दिखेंगे।
वहीं, पूर्व DGP राजीव माथुर ने इसे “अधूरा कमिश्नरेट” बताते हुए कहा कि सीमित क्षेत्र और सीमित अधिकारों के साथ यह मॉडल जनता की अपेक्षाएं पूरी नहीं कर पाएगा।
उन्होंने नया रायपुर को कमिश्नरेट में शामिल न किए जाने पर भी सवाल उठाए और सरकार से पुनर्विचार की मांग की।
रायपुर में लागू हुआ Police Commissionerate System कानून व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ा प्रयोग है।
इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी पारदर्शिता, संसाधनों और जवाबदेही के साथ लागू किया जाता है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह व्यवस्था राजधानी की सुरक्षा को नई मजबूती देती है या नई चुनौतियां खड़ी करती है।
