Chhattisgarh Constable Recruitment पर हाईकोर्ट की रोक: 6,000 पदों की भर्ती में अनियमितताओं के आरोप, नई नियुक्तियां स्थगित

Chhattisgarh Constable Recruitment Irregularities बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ में 6,000 कांस्टेबल पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायमूर्ति पी.पी. साहू की एकलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई या अंतिम निर्णय तक नई नियुक्तियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब तक जारी किए गए लगभग 2,500 नियुक्ति पत्रों को फिलहाल रद्द नहीं किया जाएगा, लेकिन आगे किसी भी अभ्यर्थी को ज्वाइनिंग लेटर जारी नहीं किया जा सकेगा।


भर्ती प्रक्रिया पर क्यों उठे सवाल?

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कांस्टेबल भर्ती में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के दौरान बड़े पैमाने पर हेरफेर और भ्रष्टाचार हुआ।
सक्ति, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली जिलों के अभ्यर्थियों ने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया कि—

  • कम अंक पाने वाले उम्मीदवारों को चयनित किया गया
  • अधिक अंक लाने वाले योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया
  • मेरिट आधारित चयन प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ

आउटसोर्स एजेंसी पर गंभीर आरोप

याचिकाओं के अनुसार, PET का संचालन Times Technology Private Limited नामक निजी एजेंसी को सौंपा गया था। आरोप है कि—

  • प्रदर्शन से जुड़े आंकड़ों में जानबूझकर गड़बड़ी की गई
  • परिणाम प्रभावित करने के लिए कथित रूप से लेन-देन हुआ
  • परीक्षा केंद्रों की CCTV फुटेज डिलीट कर दी गई, जो अहम सबूत हो सकती थी

SP बिलासपुर का पत्र बना अहम सबूत

मामले में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में 19 दिसंबर 2024 को पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर द्वारा पुलिस मुख्यालय रायपुर को लिखा गया पत्र अदालत के समक्ष रखा गया।
इस पत्र में PET के दौरान डेटा रिकॉर्डिंग में गंभीर विसंगतियों को स्वीकार किया गया था।


राज्यव्यापी गड़बड़ी की आशंका

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि चूंकि भर्ती के लिए एक ही विज्ञापन और एक ही एजेंसी पूरे राज्य में कार्यरत थी, इसलिए अनियमितताएं केवल एक जिले तक सीमित नहीं हो सकतीं।
आंतरिक जांच में 129 अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिलने की बात भी सामने आई है।


भर्ती नियमों का हवाला

याचिका में छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती नियम, 2007 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यदि गंभीर अनियमितता सिद्ध होती है, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द की जा सकती है
ऐसे में भर्ती को आगे बढ़ाना कानूनन गलत होगा।


अब आगे क्या?

  • हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है
  • मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी
  • तब तक कांस्टेबल भर्ती को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहेगी

यह मामला अब केवल भर्ती का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ गया है।

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