Dhan Kharidi 2025-26 Chhattisgarh
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी के साथ ही छत्तीसगढ़ के गांवों में सिर्फ धान ही नहीं, बल्कि भरोसे, संतोष और आत्मविश्वास की फसल भी लहलहा उठी है। शासन की किसान-हितैषी नीतियों का जीवंत उदाहरण हैं धमतरी जिले के ग्राम संबलपुर की महिला किसान श्रीमती चौती बाई साहू, जिनकी कहानी सुशासन की सशक्त तस्वीर पेश करती है।
👩🌾 पहली बार खुद संभाली धान विक्रय की जिम्मेदारी
अब तक चौती बाई के परिवार में धान विक्रय की जिम्मेदारी उनके पति निभाते थे। लेकिन इस वर्ष स्वास्थ्य कारणों से यह जिम्मेदारी चौती बाई ने स्वयं संभाली। यह उनके लिए सिर्फ धान बेचने की प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की एक नई शुरुआत थी।
पूर्व निर्धारित तिथि पर कटे टोकन के अनुसार वे 57 क्विंटल धान लेकर खरीदी केंद्र पहुँचीं। पहली बार इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाने के बावजूद उनके चेहरे पर घबराहट नहीं, बल्कि संतोष और आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था।
🏢 पारदर्शी और किसान-मैत्री व्यवस्था ने जीता भरोसा
चौती बाई बताती हैं कि धान खरीदी केंद्र की सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान-मैत्री व्यवस्था ने पूरे अनुभव को आसान बना दिया।
खरीदी केंद्र पर—
- पर्याप्त बारदाना
- हमालों की उपलब्धता
- डिजिटल तौल मशीन
- प्रशिक्षित ऑपरेटर
- पेयजल, शौचालय और बिजली
जैसी सभी मूलभूत सुविधाएँ मौजूद थीं, जिससे किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
💰 समर्थन मूल्य बना आर्थिक संबल
धान विक्रय से प्राप्त राशि से चौती बाई अपने पति के बेहतर इलाज की योजना बना रही हैं। उनकी आवाज़ में सरकार के प्रति आभार साफ झलकता है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार द्वारा
👉 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य
👉 प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी
का निर्णय किसानों के लिए सच्चा संबल साबित हुआ है। इससे खेती लाभकारी बनी है और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिली है।
🌱 बढ़ा आत्मविश्वास, घटी भविष्य की चिंता
चौती बाई मानती हैं कि बढ़े हुए समर्थन मूल्य से उनके परिवार के जीवन में स्थिरता आई है।
अब—
- घर के खर्च
- इलाज
- बच्चों और भविष्य की जरूरतें
पहले जैसी चिंता का कारण नहीं रहीं।
उन्होंने खरीदी केंद्र के कर्मचारियों, हमालों और प्रशासनिक अमले की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने सम्मान, संवेदनशीलता और सहयोग के साथ काम किया।
✨किसान-केंद्रित नीतियों की सशक्त पहचान
Dhan Kharidi 2025-26 Chhattisgarh में चौती बाई साहू की कहानी सिर्फ एक महिला किसान की सफलता नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि जब नीतियाँ ईमानदारी से ज़मीन पर उतरती हैं, तो उनका लाभ सीधे अंतिम पंक्ति में खड़े किसान तक पहुँचता है।
आज संबलपुर की चौती बाई सिर्फ धान बेचने वाली किसान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की किसान-केंद्रित नीतियों की जीवंत पहचान बन चुकी हैं—
जिनकी मुस्कान में भरोसा भी है और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी।
