Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट से मिली जमानत के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट 28 जनवरी को सुनवाई करेगा।
यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें ईडी की कार्रवाई, पूर्व मुख्यमंत्री का परिवार और करोड़ों रुपये के कथित आर्थिक अपराध सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
हाई कोर्ट से मिली राहत, सरकार ने जताई आपत्ति
बिलासपुर हाईकोर्ट ने हाल ही में चैतन्य बघेल को सशर्त जमानत दी थी। कोर्ट ने आदेश में कहा था कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और जांच की मौजूदा स्थिति को देखते हुए जमानत दी जा सकती है।
हालांकि, राज्य सरकार इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। सरकार का कहना है कि यह मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है और अभी जांच पूरी नहीं हुई है। साथ ही आरोपी एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़ा है, जिससे जांच प्रभावित होने की आशंका है।
इन्हीं आधारों पर सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
ईडी की कार्रवाई और गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 18 जुलाई 2025 को चैतन्य बघेल को छत्तीसगढ़ शराब घोटाला से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था।
इससे पहले ईडी ने:
- दुर्ग स्थित भूपेश बघेल के निवास पर दो बार छापेमारी की
- शराब घोटाले से जुड़े अवैध धन के लेनदेन की जांच शुरू की
ईडी का दावा है कि चैतन्य बघेल की भूमिका कथित तौर पर अवैध शराब कारोबार से अर्जित धन के लेनदेन में सामने आई है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे न्याय की जीत बताया। वहीं, राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह मामला केवल राजनीति नहीं, बल्कि आर्थिक अपराध और कानून व्यवस्था से जुड़ा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर शराब घोटाले को केंद्र में ला दिया है।
मामले से जुड़े प्रमुख बिंदु
- चैतन्य बघेल जुलाई 2025 से जेल में थे
- ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी की
- बिलासपुर हाई कोर्ट से जमानत मिली
- राज्य सरकार ने जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की
- 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय
अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। यह फैसला न केवल चैतन्य बघेल के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की जांच की दिशा भी तय कर सकता है।
