दिल्ली के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने मंगलवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि UGC Equity Regulations 2026 के नए नियम विश्वविद्यालय परिसरों में अराजकता और भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं।
तेज बारिश और भारी बैरिकेडिंग के बावजूद करीब 100 छात्र इस प्रदर्शन में शामिल हुए और आयोग को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने UGC Equity Regulations 2026 को पूरी तरह वापस लेने की मांग की। दिल्ली विश्वविद्यालय के पीएचडी छात्र अलोकित त्रिपाठी ने बताया कि UGC अधिकारियों ने उनकी बात सुनी और कुछ मांगों पर विचार का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा,
“UGC ने 15 दिनों के भीतर समाधान निकालने का भरोसा दिया है। साथ ही इक्विटी स्क्वाड में सामान्य वर्ग से एक सदस्य शामिल करने और झूठी शिकायतों को रोकने के लिए शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय न रखने पर सहमति जताई है।”
छात्रों ने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि उनकी आवाज को अनसुना नहीं किया जाएगा।
‘आरोपी पर ही पूरा बोझ’ – छात्रों की आपत्ति
छात्रों का आरोप है कि नए नियमों में आरोप सिद्ध करने की जिम्मेदारी पूरी तरह आरोपी पर डाल दी गई है, जबकि गलत तरीके से फंसाए गए छात्रों के लिए कोई ठोस सुरक्षा प्रावधान नहीं हैं।
अलोकित त्रिपाठी के अनुसार,
“ये नियम दमनकारी हैं। पीड़ित की परिभाषा पहले से तय कर दी गई है। ऐसे में कैंपस में हर कोई संभावित आरोपी बन सकता है।”
निगरानी का डर और ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’
श्री वेंकटेश्वर कॉलेज के छात्र हर्ष पांडे ने कहा कि नए नियम बिना व्यापक विचार-विमर्श के लागू किए गए हैं।
उन्होंने कहा,
“ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं। इससे कैंपस में डर और अविश्वास का माहौल बनेगा।”
छात्रों का मानना है कि Equity Squad के गठन से विश्वविद्यालयों में लगातार निगरानी जैसा माहौल बन जाएगा।
AISA का समर्थन, लेकिन कुछ आपत्तियां भी
वामपंथी छात्र संगठन AISA ने UGC Equity Regulations 2026 का समर्थन करते हुए कहा कि OBC छात्रों को इक्विटी के दायरे में लाना एक सकारात्मक कदम है।
हालांकि संगठन ने यह भी कहा कि:
- SC, ST, OBC और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी अस्पष्ट है
- भेदभाव की परिभाषा बहुत व्यापक और अमूर्त है
AISA ने भी नियमों में स्पष्टता की मांग की है।
देशभर में बहस, सरकार का पक्ष
UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में छात्र, शिक्षक और सामाजिक संगठन चर्चा कर रहे हैं।
केंद्र सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में न्याय और जवाबदेही बढ़ाना है।
वहीं, कई शिक्षाविदों और छात्रों को आशंका है कि ये नियम सामाजिक विभाजन को और गहरा कर सकते हैं।
UGC Equity Regulations 2026 को लेकर छात्र समुदाय बंटा हुआ नजर आ रहा है। एक ओर इसे सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर छात्र इसे कैंपस स्वतंत्रता के लिए खतरा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में UGC का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा।
