गणतंत्र दिवस समारोह में डॉ. आंबेडकर का नाम न लेने पर मंत्री के खिलाफ महिला कर्मी का विरोध

Republic Day Controversy Nashik: महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य सरकारी समारोह के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब मंच से भाषण दे रहे ग्रामीण विकास एवं जिले के पालक मंत्री गिरिश महाजन के खिलाफ एक महिला कर्मचारी ने सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराया।

यह कार्यक्रम पुलिस परेड ग्राउंड, नासिक में आयोजित किया गया था, जहां बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक मौजूद थे।


🇮🇳 भाषण के दौरान क्यों भड़का विवाद?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंत्री गिरिश महाजन अपने संबोधन में
👉 संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम लिए बिना आगे बढ़ गए।

इसी बात से आहत होकर वन विभाग की महिला कर्मचारी माधुरी जाधव ने मौके पर ही नारेबाजी शुरू कर दी।
इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से कुछ देर के लिए कार्यक्रम में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


🗣️ माधुरी जाधव ने क्या कहा?

घटनास्थल पर हुए विवाद के बाद माधुरी जाधव ने मीडिया से बात करते हुए कहा—

“पालक मंत्री ने अपने भाषण में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम एक बार भी नहीं लिया। यह बहुत बड़ी गलती है। जिस व्यक्ति ने हमें संविधान दिया और देश में लोकतंत्र की नींव रखी, उसका नाम लेना जरूरी है।”

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि
👉 उन्हें निलंबन का डर हो सकता है,
👉 लेकिन वह अपने विरोध के लिए कभी माफी नहीं मांगेंगी


⚖️ राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा

Republic Day Controversy Nashik की घटना के बाद

  • प्रशासनिक हलकों
  • राजनीतिक गलियारों
  • और सामाजिक संगठनों
    में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

कुछ लोग इसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा भावनात्मक विषय बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सरकारी कार्यक्रम की मर्यादा से जोड़कर देख रहे हैं।


📌 डॉ. आंबेडकर का नाम क्यों है इतना अहम?

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर
✔ भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पकार
✔ सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक
✔ लोकतंत्र की नींव रखने वाले विचारक

माने जाते हैं।
ऐसे में गणतंत्र दिवस जैसे अवसर पर उनका उल्लेख न होना कई लोगों को भावनात्मक रूप से आहत कर सकता है।


🔎 निष्कर्ष

नासिक में हुआ यह घटनाक्रम दिखाता है कि
👉 संविधान
👉 लोकतंत्र
👉 और डॉ. आंबेडकर का सम्मान
आज भी आम नागरिकों के लिए कितनी संवेदनशील भावना से जुड़ा हुआ है।

अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मामले को कैसे संभालती है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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