बीजेडी के आंदोलन के ऐलान से फिर गरमाया ओडिशा-छत्तीसगढ़ जल विवाद, जानें पूरा मामला

Mahanadi Water Dispute: ओडिशा की जीवनरेखा कही जाने वाली महानदी एक बार फिर सियासी और कानूनी बहस के केंद्र में आ गई है।
बीजू जनता दल (BJD) द्वारा पूरे ओडिशा में आंदोलन की चेतावनी और 23 जनवरी की प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक के आखिरी समय में रद्द होने से यह विवाद फिर सुर्खियों में है।

बीजेडी का आरोप है कि राज्य और केंद्र की भाजपा सरकारें इस गंभीर मुद्दे पर निष्क्रिय बनी हुई हैं, जिससे ओडिशा के हितों को नुकसान हो रहा है।


🔍 क्या है महानदी जल विवाद?

महानदी जल विवाद (Mahanadi Water Dispute) ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चला आ रहा है।
महानदी का ऊपरी हिस्सा छत्तीसगढ़ में है, जबकि ओडिशा निचले हिस्से (डाउनस्ट्रीम) में स्थित है।

ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ ने नदी पर एकतरफा तरीके से बैराज और परियोजनाएं बनाईं, जिससे गैर-मानसून अवधि में ओडिशा में पानी का प्रवाह प्रभावित हुआ।


🏛️ केंद्र की भूमिका और राजनीतिक आरोप

सितंबर 2016 में केंद्र सरकार ने इस विवाद को सुलझाने के लिए त्रिपक्षीय बैठक बुलाई थी, जिसमें

  • ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक
  • छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह
    शामिल हुए थे।

हालांकि, बीजेडी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने भाजपा शासित छत्तीसगढ़ का पक्ष लिया। इसके बाद ओडिशा सरकार ने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट और ट्रिब्यूनल तक कैसे पहुंचा मामला?

दिसंबर 2016 में ओडिशा सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
इससे पहले उसने अंतरराज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत ट्रिब्यूनल की मांग भी की थी।

जनवरी 2018 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने
महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (Mahanadi Water Disputes Tribunal) का गठन किया।

👉 यह ट्रिब्यूनल अब तक कई बार विस्तार पा चुका है और इसकी अवधि फिलहाल अप्रैल 2026 तक बढ़ाई गई है।
वर्तमान में इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी कर रही हैं।


🔄 क्या नई भाजपा सरकार से बदला ओडिशा का रुख?

ओडिशा में नई भाजपा सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अगस्त 2024 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर आपसी सहमति से समाधान की पहल की।

इसके साथ ही एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई, जिसमें

  • भाजपा
  • बीजेडी
  • कांग्रेस
    के विधायकों को शामिल किया गया।

समिति का उद्देश्य संवाद के जरिए महानदी जल विवाद का समाधान निकालना है।


🌊 ओडिशा के लिए महानदी क्यों है इतनी अहम?

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार,

  • महानदी का कुल कैचमेंट क्षेत्र: 1.41 लाख वर्ग किमी
  • छत्तीसगढ़ में: 53.9%
  • ओडिशा में: 45.73%

1953 में ओडिशा ने हीराकुंड बांध का निर्माण किया था, जो
✔ सिंचाई
✔ बिजली उत्पादन
✔ बाढ़ नियंत्रण
के लिए आज भी बेहद अहम है।

महानदी ओडिशा की कृषि, उद्योग और ऊर्जा का आधार मानी जाती है।


🗣️ बीजेडी और कांग्रेस का क्या कहना है?

बीजेडी नेता संजय दास बर्मा ने कहा कि पार्टी

“ओडिशा को उसके जल अधिकार से वंचित करने की साजिश”
के खिलाफ जल्द आंदोलन करेगी।

वहीं, ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्ता चरण दास ने आरोप लगाया कि

“माझी सरकार इस जल विवाद को सुलझाने में पूरी तरह विफल रही है।”


Mahanadi Water Dispute सिर्फ दो राज्यों के बीच पानी का विवाद नहीं, बल्कि
👉 यह ओडिशा की आजीविका, खेती और भविष्य से जुड़ा सवाल है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक सड़कों से लेकर कानूनी मंचों तक और तेज होने की संभावना रखता है।

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