Badrinath Kedarnath: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम को लेकर मंदिर प्रशासन ने एक अहम फैसला लिया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने सोमवार को घोषणा की कि अब गैर-हिंदुओं को बद्रीनाथ और केदारनाथ समेत समिति के अधीन सभी मंदिरों में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यह फैसला चारधाम यात्रा से पहले सामने आया है, जिससे धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित होगा
BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि
“मंदिर समिति के अधीन सभी मंदिरों में अब केवल हिंदू श्रद्धालुओं को ही प्रवेश दिया जाएगा।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में एक प्रस्ताव आगामी मंदिर समिति बोर्ड बैठक में औपचारिक रूप से पारित किया जाएगा। इसके बाद निर्णय को पूरी तरह लागू किया जाएगा।
चारधाम यात्रा के प्रमुख केंद्र हैं बद्रीनाथ और केदारनाथ
गौरतलब है कि
- बद्रीनाथ और केदारनाथ
- गंगोत्री और यमुनोत्री
ये चारों धाम छोटा चारधाम यात्रा का हिस्सा हैं। इनमें से बद्रीनाथ और केदारनाथ BKTC के प्रशासनिक नियंत्रण में आते हैं।
Badrinath Kedarnath non-Hindus entry ban का यह निर्णय सीधे तौर पर इन दोनों प्राचीन मंदिरों से जुड़ा है, जिनकी आस्था देश ही नहीं, दुनिया भर में फैली हुई है।
23 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट
इसी बीच, श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना भी सामने आई है।
मंदिर अधिकारियों के अनुसार,
- बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को
- छह महीने के शीतकालीन अवकाश के बाद
- श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
हेमंत द्विवेदी ने बताया कि कपाट खुलने की तिथि और शुभ मुहूर्त का निर्धारण
बसंत पंचमी के अवसर पर
नरेंद्र नगर (टिहरी) स्थित राजमहल में
पारंपरिक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद किया गया।
19 अप्रैल को खुलेंगे गंगोत्री और यमुनोत्री धाम
चारधाम यात्रा से जुड़े अन्य धामों के कपाट भी जल्द खुलने जा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार,
- गंगोत्री और यमुनोत्री धाम
- अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) के दिन
श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
धार्मिक परंपरा और आस्था से जुड़ा फैसला
मंदिर समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि यह फैसला
- मंदिरों की पारंपरिक मर्यादा
- और धार्मिक आस्थाओं की शुद्धता
को ध्यान में रखकर लिया गया है।
हालांकि, Badrinath Kedarnath non-Hindus entry ban को लेकर आने वाले दिनों में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
