विशेष CBI कोर्ट ने भूपेश बघेल को मिली डिस्चार्ज राहत पलटी, ट्रायल का रास्ता साफ

Bhupesh Baghel sex CD case

सेक्स CD केस में एक अहम कानूनी मोड़ सामने आया है। रायपुर की विशेष CBI अदालत ने 24 जनवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए वर्ष 2024 में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को दी गई डिस्चार्ज राहत को निरस्त कर दिया।
यह मामला वर्ष 2017 के उस कथित अश्लील वीडियो से जुड़ा है, जिसे पूर्व मंत्री राजेश मुनत की छवि धूमिल करने से जोड़ा गया था।


मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश पलटा गया

विशेष CBI कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा भूपेश बघेल को आरोपों से मुक्त किया जाना विधिसम्मत नहीं था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया मामले में ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं, इसलिए डिस्चार्ज आदेश को रद्द किया जाता है।

इसके साथ ही अदालत ने अन्य आरोपियों—कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा और विजय भाटिया—द्वारा दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया। इन अपीलों में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने को चुनौती दी गई थी।


क्या है बहुचर्चित सेक्स CD केस

Bhupesh Baghel sex CD case छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील मामला रहा है।
यह विवादित CD पूर्व मंत्री और भाजपा नेता राजेश मुनत से संबंधित बताई गई थी, जिसमें आपत्तिजनक सामग्री होने का दावा किया गया था।

अक्टूबर 2016 में पत्रकार विनोद वर्मा को उत्तर प्रदेश से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उनके पास इस CD की लगभग 500 प्रतियां थीं और उन्होंने कथित रूप से वीडियो में छेड़छाड़ कर उसे राजनीतिक हलकों में प्रसारित किया।


भूपेश बघेल की गिरफ्तारी और CBI जांच

राजेश मुनत की शिकायत पर दर्ज FIR के आधार पर तत्कालीन कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को भी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
बाद में मामला CBI को सौंपा गया, जिसने विस्तृत जांच के बाद मुख्य और पूरक आरोप पत्र दाखिल किया।

CBI की चार्जशीट में कुल छह आरोपियों के नाम शामिल हैं, जिनमें भूपेश बघेल भी शामिल हैं। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि विनोद वर्मा उस समय भूपेश बघेल के कंसल्टेंट के रूप में कार्य कर रहे थे।


राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से अहम फैसला

विशेष CBI कोर्ट का यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी इसके दूरगामी प्रभाव माने जा रहे हैं।
अब मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिससे वर्षों से लंबित इस केस में नई गतिविधि देखने को मिलेगी।

यह मामला लंबे समय से राजनीतिक बहस और न्यायिक समीक्षा के केंद्र में रहा है, और ताजा आदेश ने इसे फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

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