India EU Free Trade Deal: भारत के 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार सिर्फ सैन्य परेड और सांस्कृतिक झलकियां ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और व्यापार से जुड़ा एक बड़ा संदेश भी छिपा है।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।
इस दौरे का सबसे अहम एजेंडा है—India EU Free Trade Deal को आगे बढ़ाना, जो लगभग दो दशक से बातचीत के दौर से गुजर रहा है।
ट्रंप फैक्टर और बदला हुआ वैश्विक परिदृश्य
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब यूरोप और अमेरिका के रिश्तों में तनाव है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय सहयोगियों पर व्यापार युद्ध की धमकी और भारत पर 50% टैरिफ का मुद्दा नई भू-राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत द्वारा यूरोपीय संघ को गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित करना यह साफ संदेश देता है कि—
भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन और विविधता बनाए रखना चाहता है और किसी एक देश पर निर्भर नहीं है।
27 जनवरी को हो सकता है ऐतिहासिक ऐलान
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 27 जनवरी को भारत-EU उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन के दौरान India EU Free Trade Deal की औपचारिक घोषणा हो सकती है।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इस समझौते को पहले ही
👉 “Mother of All Deals”
कह चुके हैं, जो इसकी अहमियत को दर्शाता है।
भारत और यूरोप—दोनों को क्यों है यह डील जरूरी?
🇮🇳 भारत के लिए
- EU भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है
- FTA से GSP (जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस) की बहाली संभव
- कपड़ा, दवा, स्टील, पेट्रोलियम और मशीनरी जैसे निर्यात को फायदा
- अमेरिकी टैरिफ के झटकों से राहत
🇪🇺 यूरोपीय संघ के लिए
- चीन पर निर्भरता कम करने का मौका
- भारत के साथ 2 अरब लोगों का साझा फ्री मार्केट
- वैश्विक GDP का लगभग 25% हिस्सा
किन मुद्दों पर अब भी अटकी है बात?
हालांकि India EU Free Trade Deal अंतिम दौर में है, लेकिन कुछ मतभेद अब भी बाकी हैं—
- यूरोप की चिंता:
- बौद्धिक संपदा अधिकार
- डेटा प्रोटेक्शन और पेटेंट नियम
- भारत की आपत्ति:
- यूरोप का नया CBAM (Carbon Border Adjustment Mechanism) टैक्स
- MSME सेक्टर पर बढ़ता अनुपालन बोझ
विशेषज्ञों का मानना है कि इन मुद्दों का समाधान ही तय करेगा कि यह समझौता समान विकास का माध्यम बनेगा या नहीं।
रणनीति, प्रतीक और भविष्य की तस्वीर
विश्लेषकों के अनुसार, यह डील सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी है।
भारत और EU—दोनों अमेरिका और चीन जैसी अनिश्चित शक्तियों पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।
लंबे समय में यह समझौता—
- सप्लाई चेन को स्थिर करेगा
- व्यापार को राजनीति से अलग करने में मदद करेगा
- भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में और मजबूत करेगा
निष्कर्ष
India EU Free Trade Deal सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक संतुलन में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत है।
गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी इस बात की पुष्टि करती है कि भारत अब सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक फैसलों का केंद्र बन रहा है।
