रायपुर | Chhattisgarh Backward Class Commission Hearing
छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में प्राप्त विभिन्न शिकायतों की सुनवाई आज आयोग के अध्यक्ष श्री नेहरू राम निषाद एवं उपाध्यक्ष श्रीमती चन्द्रकान्ति वर्मा के नेतृत्व में सम्पन्न हुई। इस सुनवाई में आयोग के सचिव श्री संकल्प साहू एवं अनुसंधान अधिकारी श्रीमती अनिता डेकाटे भी उपस्थित रहीं।
यह सुनवाई उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई, जो लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे थे।
⚖️ लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा
सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष लंबित सभी प्रकरणों की विस्तार से समीक्षा की गई।
साथ ही, प्रत्येक शिकायतकर्ता और अनावेदक पक्ष को निष्पक्ष रूप से अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया।
आयोग के अध्यक्ष श्री नेहरू राम निषाद ने शिकायतकर्ताओं की बातों को गंभीरता से सुना और नियमों व अधिनियमों के अनुरूप न्यायसंगत निर्णय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
💼 वेतन वृद्धि और भुगतान से जुड़े मामलों में राहत
- श्री चन्द्रकुमार सोनकर के समेकित वेतन वृद्धि रोके जाने के प्रकरण में
👉 राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ द्वारा वर्ष 2018-19 की वेतन वृद्धि प्रदान करने का आश्वासन दिया गया। - श्री नरेश कुमार धीवर के मामले में
👉 60 दिवस के भीतर 1.80 लाख रुपये भुगतान के लिए समझौतानामा निष्पादित किया गया।
ये फैसले प्रभावित कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हुए हैं।
🎓 आरक्षण उल्लंघन पर सख्त रुख
श्री सुरेश कुमार यादव द्वारा प्रस्तुत सहायक प्राध्यापक भर्ती में आरक्षण उल्लंघन की शिकायत पर दोनों पक्षों का प्रतिपरीक्षण किया गया।
आयोग ने शासन को विषयवार पद विज्ञापन जारी करने का सुझाव प्रेषित करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में आरक्षण नियमों का पूर्ण पालन हो सके।
🏗️ अन्य मामलों में भी सुनवाई और निर्देश
- श्री रामशंकर साहू एवं श्री शैलेश कुमार स्वर्णकार की शिकायत पर
👉 अधीक्षण अभियंता श्री एस.एस. भूपल उपस्थित हुए और बताया कि स्थानांतरण आदेशों से असंतुष्ट होकर निराधार शिकायत की गई है। - श्री नरेन्द्र कुमार यादव एवं अन्य बनाम बैकुंठ सीमेंट कंपनी प्रकरण में
👉 दोनों पक्षों की उपस्थिति में सुनवाई हुई।
👉 अनावेदक पक्ष ने आगामी तिथि में ठेकेदारों एवं कंपनी प्रतिनिधियों से पूछताछ की जानकारी दी।
सुनवाई के उपरांत छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्णयों के शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन के स्पष्ट निर्देश जारी किए।
यह कार्यवाही न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करती है, बल्कि पिछड़े वर्ग के लोगों के न्याय और अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
