Raipur | Chhattisgarh News
छत्तीसगढ़ ने 2028 राष्ट्रीय खेलों (Chhattisgarh National Games 2028) की मेज़बानी के लिए औपचारिक पहल शुरू कर दी है। इस दिशा में राज्य के खेल संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने नई दिल्ली में केंद्रीय खेल मंत्री श्री मनसुख मांडविया से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की।
यह संवाद भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुआ, जिसमें देशभर के राज्य ओलंपिक संघों और खेल महासंघों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
🏅 IOA मंच पर उठी छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेल देने की मांग
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव विक्रम सिसोदिया ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष राज्य को राष्ट्रीय खेलों की मेज़बानी सौंपने का विषय रखा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में IOA और केंद्रीय खेल मंत्रालय से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेलों की मेज़बानी की सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी थी, लेकिन उस समय आयोजन संभव नहीं हो पाया।
अब, बदली परिस्थितियों और मजबूत तैयारियों के साथ राज्य सरकार इस प्रस्ताव को दोबारा साकार करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
🏟️ मजबूत खेल अधोसंरचना बना छत्तीसगढ़ की ताकत
चर्चा के दौरान यह भी बताया गया कि पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ ने अपनी खेल अधोसंरचना को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है।
विशेष रूप से—
- रायपुर
- दुर्ग
- बिलासपुर
में बने आधुनिक स्टेडियम और खेल सुविधाएं किसी भी बहु-खेल आयोजन के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं। इसके अलावा अन्य शहरों में भी खेल परिसरों का विकास किया गया है, जो राष्ट्रीय खेलों जैसे बड़े आयोजन के लिए सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
🗺️ राष्ट्रीय खेलों का अगला चक्र, छत्तीसगढ़ को उम्मीद
विक्रम सिसोदिया ने बताया कि—
- 38वें राष्ट्रीय खेल उत्तराखंड में आयोजित हो चुके हैं
- 39वें राष्ट्रीय खेल मेघालय में प्रस्तावित हैं
- 40वें राष्ट्रीय खेल की तैयारियां चल रही हैं
ऐसे में उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि अगले चक्र में छत्तीसगढ़ को अवसर दिया जाए।
🌱 जनजातीय खेलों से मजबूत हो रही खेल संस्कृति
बैठक में छत्तीसगढ़ में ट्राइबल गेम्स के आयोजन की पहल के लिए केंद्र सरकार का आभार भी जताया गया। सिसोदिया ने कहा कि ऐसे आयोजन न सिर्फ जनजातीय प्रतिभाओं को मंच देते हैं, बल्कि राज्य में खेल संस्कृति को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हैं।
Chhattisgarh National Games 2028 की मेज़बानी की दिशा में यह पहल राज्य के लिए एक बड़ा अवसर है। यदि छत्तीसगढ़ को यह जिम्मेदारी मिलती है, तो इससे न सिर्फ खेल अधोसंरचना को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि राज्य के युवा खिलाड़ियों को भी नई उड़ान मिलेगी।
