इंदौर।
Indore water contamination outbreak: मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी के कारण फैले उल्टी-दस्त (वॉमिटिंग-डायरिया) प्रकोप ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार को इंदौर पहुंचे और इस बीमारी से प्रभावित मरीजों तथा उनके परिजनों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया।
🏥 अस्पताल पहुंचकर मरीजों का हाल जाना
राहुल गांधी ने शहर के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती चार मरीजों से मुलाकात की। उन्होंने न सिर्फ मरीजों की सेहत के बारे में जानकारी ली, बल्कि उनके परिजनों से बात कर उनकी पीड़ा भी सुनी।
इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और वरिष्ठ नेता उमंग सिंघार भी उनके साथ मौजूद रहे।
मरीजों के परिजनों ने बताया कि बीमारी अचानक फैली और देखते ही देखते कई घरों में मातम छा गया। राहुल गांधी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जाएगा।
🚓 सुरक्षा के कड़े इंतजाम, इलाके में तनाव
राहुल गांधी की यात्रा को देखते हुए भागीरथपुरा इलाके में पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
यह वही इलाका है जहां पिछले महीने से उल्टी-दस्त का प्रकोप सबसे अधिक देखा गया।
⚠️ मौतों के आंकड़ों पर बड़ा विरोधाभास
स्थानीय निवासियों का दावा है कि अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है।
वहीं, मध्यप्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में पेश अपनी स्टेटस रिपोर्ट में सिर्फ 7 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें एक पांच महीने का शिशु भी शामिल है।
हालांकि, सरकारी महत्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की एक समिति द्वारा तैयार डेथ ऑडिट रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि 15 मौतें किसी न किसी रूप में इस प्रकोप से जुड़ी हो सकती हैं।
💰 पीड़ित परिवारों को मुआवजा
प्रशासन ने बताया कि प्रकोप शुरू होने के बाद जिन 21 लोगों की मौत हुई, उनके परिजनों को ₹2 लाख प्रति परिवार की सहायता राशि दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि कुछ मौतें अन्य बीमारियों या कारणों से भी हुई होंगी, लेकिन मानवीय आधार पर सभी शोकाकुल परिवारों को आर्थिक मदद दी गई।
Indore water contamination outbreak ने एक बार फिर शहरी बुनियादी ढांचे और पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी की यह यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक दौरा नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए एक सहारा बनकर आई, जो अपनों को खोने या उनकी जिंदगी बचाने की जंग लड़ रहे हैं। अब जरूरत है पारदर्शी जांच, साफ आंकड़ों और स्थायी समाधान की, ताकि भविष्य में कोई शहर ऐसी त्रासदी न झेले।
