कश्मीर की खूबसूरत वादियों में बसे पहलगाम में हुआ आतंकी हमला केवल एक हमला नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा पर वार था। मासूम पर्यटकों की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया। लेकिन उसी क्षण से Operation Sindoor की नींव पड़ चुकी थी।
वीर चक्र से सम्मानित कर्नल कोशांक लांबा ने अब उस गुप्त सैन्य अभियान की अंदरूनी कहानी साझा की है, जिसने आतंकियों को करारा जवाब दिया।
“आदेश की जरूरत नहीं पड़ी, यह हमारे प्रशिक्षण का हिस्सा है”
कर्नल लांबा कहते हैं,
“जब भी देश पर आतंकी हमला होता है, सेना अपने आप युद्धस्तर की तैयारी में चली जाती है। किसी आदेश की जरूरत नहीं होती, यह हमारी ट्रेनिंग का हिस्सा है।”
पहलगाम हमले के तुरंत बाद भारतीय सेना की यूनिट्स को गोपनीय तरीके से उनके तय स्थानों पर भेज दिया गया। दुश्मन को भनक तक नहीं लगी।
आतंकी नागरिकों के बीच छिपे थे, फिर भी सेना ने सटीक वार किया
खुफिया जानकारी में सामने आया कि आतंकियों ने अपने ट्रेनिंग कैंप नागरिक इलाकों में बना रखे थे ताकि उन्हें मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा सके।
लेकिन Operation Sindoor में भारतीय सेना ने एक असाधारण रणनीति अपनाई।
कर्नल लांबा बताते हैं,
“हमने आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचाने का फैसला किया। फिर भी आतंकियों के सभी कैंप 100% तबाह कर दिए गए।”
उत्तरी कमान में आतंक के गढ़ ध्वस्त
कर्नल लांबा की यूनिट को उत्तरी कमान के सबसे खतरनाक आतंकी ठिकानों पर हमला करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
उन्होंने गोलाबारी और बमबारी के जरिए दर्जनों आतंकियों को ढेर कर दिया और पूरे नेटवर्क को नष्ट कर दिया।
सेना ने स्पष्ट संदेश दिया —
पहलगाम का बदला लिया गया है।
पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई भी विफल
आतंकियों के सफाए के बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और आत्मघाती हमले की कोशिशें हुईं, लेकिन भारतीय सेना पहले से तैयार थी।
कर्नल लांबा ने कहा,
“हम हर स्थिति के लिए तैयार थे। इसलिए हमारी तरफ नुकसान बेहद कम हुआ।”
यह Operation Sindoor की सैन्य सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बना।
वीर चक्र से सम्मानित कर्नल लांबा
उनकी असाधारण बहादुरी और रणनीतिक नेतृत्व के लिए कर्नल कोशांक लांबा को वीर चक्र से सम्मानित किया गया — जो भारत का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है।
उन्होंने इसे “देश के लिए लड़ने का सम्मान” बताया।
NDTV Indian of the Year में सेना की आवाज
NDTV Indian of the Year मंच पर भारतीय सेना को मिले सम्मान को लेकर कर्नल लांबा ने कहा कि इससे सेना को पूरे देश के सामने अपनी बात रखने का अवसर मिला।
Operation Sindoor सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह उन निर्दोषों के लिए न्याय था जिनकी जान पहलगाम में ली गई थी।
यह अभियान बताता है कि जब बात देश की सुरक्षा की आती है, तो भारतीय सेना चुप नहीं रहती — वह निर्णायक कार्रवाई करती है।
