Atulya Dantewada Tourism: कभी घने जंगलों, जनजातीय संस्कृति और संघर्ष की पहचान रहा दंतेवाड़ा अब छत्तीसगढ़ के पर्यटन नक्शे पर चमकता सितारा बनता जा रहा है।
Atulya Dantewada Tourism अभियान के तहत बारसूर, मुचनार और सातधार नदी जैसे क्षेत्रों में इतिहास, रोमांच और अध्यात्म का ऐसा संगम दिख रहा है, जो पूरे बस्तर को नई पहचान दे रहा है।
आज यहां आने वाला हर सैलानी सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि खुद को महसूस करने आता है।
🛕 बारसूर: जब बस्तर था दक्षिण कोसल का सांस्कृतिक केंद्र
इतिहासकार बताते हैं कि 10वीं–11वीं शताब्दी में बारसूर दक्षिण कोसल का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र था।
यहां मिले सैकड़ों मंदिरों के अवशेष बताते हैं कि यह कभी ‘मंदिरों का नगर’ कहलाता था।
नागर शैली में बने शिव, विष्णु और गणेश मंदिर आज भी बस्तर की समृद्ध स्थापत्य और आध्यात्मिक परंपरा की कहानी कहते हैं।
अब यही बारसूर, Atulya Dantewada Tourism के तहत पर्यटकों को इतिहास से जोड़ रहा है।
🧗 जिपलाइन और नाइट कैंपिंग: जंगल में रोमांच का नया अनुभव
बारसूर–मुचनार क्षेत्र में जिले की सबसे लंबी जिपलाइन आज युवाओं और एडवेंचर प्रेमियों का सबसे बड़ा आकर्षण बन चुकी है।
ऊंचाई से जंगलों और घाटियों के बीच फिसलते हुए लोग बस्तर की हरियाली को बिल्कुल नए नजरिए से देखते हैं।
वहीं नाइट कैंपिंग जंगल के अनुभव को और खास बना देती है—
तारों से सजी रात, ठंडी हवाएं और प्रकृति की आवाजें मिलकर मन को अद्भुत शांति देती हैं।
🌊 सातधार नदी: प्रकृति और साधना का मिलन
सातधार नदी का कल-कल बहता जल बस्तर की आत्मा को दर्शाता है।
नदी के किनारे फैली हरियाली, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को ध्यान, फोटोग्राफी और सुकून के लिए खींच लाता है।
मान्यता है कि प्राचीन काल में साधु-संत यहां तपस्या करते थे।
आज यह जगह Atulya Dantewada Tourism का सबसे शांत और आध्यात्मिक पड़ाव बन चुकी है।
🌿 दंतेवाड़ा बन रहा छत्तीसगढ़ का नया टूरिज्म हॉटस्पॉट
रोमांच, इतिहास और प्रकृति का यह मेल दंतेवाड़ा को सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक अनुभव बना रहा है।
अब बस्तर की पहचान सिर्फ जंगलों और संघर्ष से नहीं, बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव से भी हो रही है।
Atulya Dantewada Tourism अभियान ने दंतेवाड़ा को नई उड़ान दे दी है—जहां हर रास्ता कहानी कहता है और हर दृश्य मन को छू जाता है।
