Dhamtari में 50 साल बाद रबी खेती की वापसी, आत्मा योजना से आदिवासी गांवों में रागी की ऐतिहासिक शुरुआत

धमतरी जिले के सुदूर वनाच्छादित और आदिवासी बहुल उच्चहन क्षेत्र में खेती का नया सवेरा उगा है।
लगभग 50 वर्षों बाद ग्राम डांगीमांचा और खिड़कीटोला में रबी मौसम की संगठित खेती फिर से शुरू हुई है। इस बार यह शुरुआत Dhamtari Ragi Farming के रूप में हुई है, जो पूरे इलाके के लिए आशा की नई किरण बन गई है।


🌾 35 एकड़ में रागी की नई उम्मीद

कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत इन दोनों गांवों में कुल 35 एकड़ भूमि पर रागी (मिलेट) की खेती की जा रही है।
यह क्षेत्र गंगरेल बांध के ऊपरी हिस्से में स्थित है, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद किसानों ने रागी उगाकर इतिहास रच दिया है।


🌱 SMI तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर

Dhamtari Ragi Farming को सफल बनाने के लिए किसानों को SMI (Systematic Millets Intensification) पद्धति सिखाई जा रही है।
इस तकनीक से कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और पोषण सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।


👩‍🌾 महिला किसानों की मजबूत भागीदारी

ग्राम स्तर पर आयोजित कृषक पाठशाला में 40 महिला और 32 पुरुष किसानों ने भाग लिया।
यहां बीज उत्पादन, फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण और बाजार से जुड़ने की पूरी जानकारी दी गई।


🌍 रागी से बदलेगा आदिवासी अंचल का भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि Dhamtari Ragi Farming जलवायु अनुकूल खेती का बेहतरीन उदाहरण है।
रागी के पोषण और स्वास्थ्य लाभ इसे आने वाले समय में ग्रामीण आजीविका का मजबूत आधार बना सकते हैं।


डांगीमांचा और खिड़कीटोला में रागी की खेती सिर्फ एक फसल नहीं, बल्कि आदिवासी क्षेत्र के आत्मनिर्भर भविष्य की शुरुआत है।
आत्मा योजना से जुड़कर किसान अब अपने खेतों से सीधे समृद्धि की फसल काटने को तैयार हैं।

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