Korba Gaura Puja News: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में आयोजित गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन इस बार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रतीक बन गया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महर्षि वाल्मीकि आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल होकर आदिवासी समाज को सम्मान और विकास का नया भरोसा दिया।
🛣️ ‘जनजातीय गौरव पथ’ की ऐतिहासिक घोषणा
मुख्यमंत्री ने आईटीआई चौक से बालको रोड को
👉 ‘जनजातीय गौरव पथ’ नाम देने
और
👉 इसके प्रारंभिक बिंदु पर जनजातीय महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा की।
यह फैसला जनजातीय समाज के इतिहास और योगदान को स्थायी सम्मान देने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
🌿 आदिवासी समाज की परंपराओं को मिलेगा संरक्षण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि
बैगा और पुजेरी समाज आज भी जनजातीय परंपराओं के संरक्षक हैं।
इसी कारण राज्य सरकार उन्हें सम्मान निधि देकर उनके योगदान को सम्मानित कर रही है।
उन्होंने बताया कि
- बैगा, गुनिया और सिरहा को हर वर्ष ₹5000 की सहायता
- सरना स्थलों का संरक्षण
जैसे कदम जनजातीय पहचान को मजबूत कर रहे हैं।
💰 80 हजार करोड़ से बदलेगा आदिवासी अंचल
Korba Gaura Puja News के मंच से मुख्यमंत्री ने बताया कि—
- धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना – ₹80,000 करोड़
- पीएम जनमन योजना – ₹24,000 करोड़
इन योजनाओं से छत्तीसगढ़ के 6,691 गांवों को सीधा लाभ मिल रहा है, खासकर पहाड़ी कोरवा, बिरहोर और अन्य PVTG समुदायों को।
🏛️ आदिवासी समाज का गौरव देश के शीर्ष पदों तक
मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि—
- देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आदिवासी समाज से हैं
- और छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी आदिवासी किसान परिवार से आता है
यह जनजातीय समाज के बढ़ते सम्मान का प्रमाण है।
🖥️ नवा रायपुर में डिजिटल जनजातीय संग्रहालय
नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने के लिए
नवा रायपुर में डिजिटल जनजातीय संग्रहालय बनाया गया है, जहां जनजातीय महापुरुषों की जीवन गाथाएं चित्रों और डिजिटल माध्यम से प्रदर्शित हैं।
🏗️ पर्यटन और विकास की नई राह
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि
कोरबा जिले के देवी-देवताओं के स्थलों को पर्यटन से जोड़ा जा रहा है, जिससे रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों मजबूत होंगी।
🔔 निष्कर्ष
Korba Gaura Puja News यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ सरकार केवल योजनाएं नहीं बना रही, बल्कि जनजातीय समाज को सम्मान, पहचान और भविष्य भी दे रही है। गौरा पूजा के मंच से घोषित ‘जनजातीय गौरव पथ’ आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।
