Dharwad Suffocation Death: कोयले के चूल्हे के धुएं से नेपाली युवक की मौत, छह साथी अस्पताल में भर्ती

कर्नाटक के धारवाड़ शहर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां नंदिनी लेआउट इलाके में रहने वाले सात नेपाली मजदूरों में से एक की दम घुटने से मौत हो गई, जबकि छह अन्य गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। इस हादसे को अब Dharwad suffocation death के रूप में दर्ज किया जा रहा है।


🏠 कमरे में जला कोयला, बंद दरवाज़े बने मौत की वजह

पुलिस के अनुसार, सभी सात युवक एक स्थानीय भोजनालय में काम करते थे और एक ही कमरे में रहते थे। शुक्रवार रात उन्होंने कोयले के चूल्हे पर खाना बनाया और फिर दरवाज़े व खिड़कियां बंद करके सो गए

रात भर कमरे में कोयले का धुआं भरता रहा और उन्हें पता भी नहीं चला कि वे एक ज़हरीले माहौल में सांस ले रहे हैं।


☎️ काम पर नहीं पहुंचे, तब खुला राज

शनिवार सुबह जब कोई भी युवक काम पर नहीं पहुंचा, तो भोजनालय मालिक को चिंता हुई। वह उनके कमरे पर गया और अंदर का नज़ारा देखकर सन्न रह गया। सभी युवक बेहोशी की हालत में पड़े थे। उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी।


🚑 एक की मौत, छह की हालत गंभीर

इस Dharwad suffocation death में 40 वर्षीय बिबेक की मौके पर ही मौत हो गई।
अन्य घायल — नितेश (45), नरेश (45), डिकेशी (40), सुधन (30), कुमार (50) और लक्ष्मण (30) — को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से दो की हालत ICU में गंभीर बनी हुई है।


👮 पुलिस की शुरुआती जांच

पुलिस आयुक्त एन. शशिकुमार ने बताया कि कमरे में कोई भी खिड़की या दरवाज़ा खुला नहीं था और फूड प्वाइजनिंग के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
उनका कहना है कि कोयले के धुएं से दम घुटना ही इस हादसे की सबसे बड़ी वजह प्रतीत होती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही अंतिम पुष्टि होगी।


🧠 सबक देने वाली घटना

Dharwad suffocation death एक बार फिर याद दिलाती है कि बंद कमरे में कोयले या आग का इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है। थोड़ी सी सावधानी इन सात लोगों की जिंदगी बचा सकती थी।


यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा के प्रति लापरवाही का दुखद परिणाम है। उम्मीद है कि यह घटना लोगों को सतर्क करेगी और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

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