सुकमा में 26 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, 56 जवानों की शहादत से जुड़े 3 हार्डकोर माओवादी शामिल

सुकमा।
Maoist Surrender in Sukma: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। ‘पूना मार्गम’ अभियान के तहत बुधवार को 26 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
इनमें 7 महिलाएं भी शामिल हैं। सबसे अहम बात यह है कि आत्मसमर्पण करने वालों में वे 3 हार्डकोर नक्सली भी हैं, जिन पर अलग-अलग हमलों में 56 जवानों की शहादत से जुड़े होने के आरोप हैं।


🌿 क्या है ‘पूना मार्गम’ अभियान?

‘पूना मार्गम’ गोंडी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है “नया रास्ता”
इस अभियान के तहत नक्सलियों को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
पुलिस और प्रशासन इसमें परिजनों की भावनात्मक अपील को हथियार बना रहे हैं।


🔫 PLGA बटालियन-1 लगभग खत्म

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली

  • पीएलजीए (PLGA) की बटालियन-1 से जुड़े थे
  • दक्षिण बस्तर, अबूझमाड़ और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर ज़ोन में सक्रिय थे

सुकमा पुलिस का दावा है कि अब जिले में
दार्भा और जगरगुंडा डिवीजन में सिर्फ करीब 20 सशस्त्र नक्सली बचे हैं
यानी, कुख्यात बटालियन-1 को लगभग बाहर खदेड़ दिया गया है


🩸 किन हमलों से जुड़े थे ये इनामी नक्सली?

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख नक्सली—

  • लाली उर्फ मुचकी आयते
    • कंपनी-3 का डिप्टी कमांडर
    • इनाम: ₹10 लाख
  • हेमला लखमा
    • 2011 से सक्रिय प्लाटून कमांडर
    • इनाम: ₹8 लाख
    • 2017 कोरापुट रोड IED ब्लास्ट (14 जवान शहीद)
    • 2020 मिनपा जंगल हमला (17 पुलिसकर्मी शहीद)
  • मुचकी संदीप उर्फ हिड़मा
    • एरिया कमेटी मेंबर और LOS कमांडर
    • इनाम: ₹5 लाख
    • 2021 टेकलगुडेम हमला (22 जवान शहीद)
    • 2023 जगरगुंडा हमला (3 जवान शहीद)

💰 सरकार देगी राहत और इनाम

सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने बताया कि—

  • सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को तत्काल ₹50,000 की सहायता राशि दी जाएगी
  • भविष्य में कुल ₹64 लाख तक की इनामी राशि भी प्रदान की जाएगी

हालांकि, नक्सलियों ने बदले की आशंका के चलते हथियार साथ नहीं लाए।


🏞️ सिमटता नक्सली इलाका

एसपी चव्हाण के अनुसार, अब
बटालियन-1 के बचे हुए नक्सली
तेलंगाना-बीजापुर सीमा के पास करेगुट्टा पहाड़ियों में शरण लिए हुए हैं।

यह आत्मसमर्पण ऐसे समय हुआ है, जब
केंद्र सरकार मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने के लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ रही है।


Maoist Surrender in Sukma सिर्फ एक सुरक्षा सफलता नहीं,
बल्कि यह संकेत है कि हिंसा के रास्ते से लौटने की शुरुआत हो चुकी है
अब सवाल यही है—क्या बचे हुए नक्सली भी ‘नया रास्ता’ चुनेंगे?

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