नई दिल्ली / रत्नागिरी
PFAS chemical controversy in India: वैश्विक केमिकल इंडस्ट्री में China+1 रणनीति के चलते कंपनियां चीन के बाहर नए उत्पादन केंद्र तलाश रही हैं। इसी कड़ी में भारत तेजी से उभर रहा है। लेकिन इस बदलाव के बीच Laxmi Organic Industries का फ्लोरोकेमिकल क्षेत्र में प्रवेश अब एक बड़े पर्यावरणीय विवाद की वजह बन गया है।
🔬 क्या है मामला?
जून 2019 में Laxmi Organic Industries ने अपनी सहायक कंपनी Viva Lifesciences के जरिए इटली की दिवालिया कंपनी Miteni SpA की संपत्तियों का अधिग्रहण किया। इस डील के तहत कंपनी को
- अत्याधुनिक फ्लोरोकेमिकल प्लांट
- 100 से अधिक फॉर्मूलेशन
- 14 पेटेंट
- 41 REACH रजिस्ट्रेशन
मिले।
2023 की शुरुआत तक इटली का पूरा प्लांट 300 से अधिक कंटेनरों में पैक होकर महाराष्ट्र के लोटे परशुराम (रत्नागिरी) पहुंचाया गया।
🧪 PFAS क्या है और क्यों खतरनाक?
PFAS यानी Per- and Polyfluoroalkyl Substances को ‘Forever Chemicals’ कहा जाता है क्योंकि ये पर्यावरण और शरीर से आसानी से खत्म नहीं होते।
इनका उपयोग होता है—
- टेफ्लॉन और नॉन-स्टिक कोटिंग
- टेक्सटाइल
- कीटनाशक
- फायरफाइटिंग फोम
- कॉस्मेटिक्स
Laxmi Organic का संयंत्र Electrochemical Fluorination Technology पर आधारित है, जो पहले Miteni द्वारा इस्तेमाल की जाती थी।
⚠️ इटली का ‘Miteni Disaster’
इटली के Trissino (Veneto) स्थित Miteni प्लांट ने दशकों तक भूजल में PFAS छोड़ा।
इसके परिणामस्वरूप—
- 180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र प्रदूषित
- 3.5 लाख लोगों का पीने का पानी प्रभावित
- किडनी कैंसर, टेस्टिकुलर कैंसर, डायबिटीज और हृदय रोग में वृद्धि
- एक अध्ययन के अनुसार लगभग 4,000 मौतें
2018 में कंपनी दिवालिया हो गई।
जून 2025 में इटली की अदालत ने 11 पूर्व अधिकारियों को कुल 141 साल की सजा सुनाई—यह औद्योगिक प्रदूषण के मामलों में ऐतिहासिक फैसला माना गया।
🌍 भारत में क्यों उठा विरोध?
2025 के अंत में जब इटली की मशीनरी महाराष्ट्र पहुंची, तो स्थानीय नेताओं और नागरिक संगठनों ने आरोप लगाया कि
“यूरोप में प्रतिबंधित ज़हरीली तकनीक भारत लाई जा रही है।”
आरोप यह भी लगे कि मशीनें चालू होने से पहले ही हवा में PFAS फैल रहा है। इसके बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) को नोटिस जारी करना पड़ा।
📜 भारत में PFAS पर कानून कहां खड़ा है?
जब यह संयंत्र लगाया गया, तब भारत में—
- औद्योगिक अपशिष्ट में PFAS के लिए कोई मानक नहीं
- पीने के पानी में PFAS की सीमा तय नहीं
हालांकि, अक्टूबर 2025 में FSSAI ने खाद्य पैकेजिंग में PFAS पर प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा।
इसके अलावा Draft Indian Chemicals (Management and Safety) Rules के तहत रसायनों की अनिवार्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया लाने की तैयारी है।
🌐 दुनिया में सख्त नियम
- 🇺🇸 अमेरिका: EPA ने PFAS की सीमा 4 पार्ट्स प्रति ट्रिलियन तय की
- 🇪🇺 यूरोपियन यूनियन: 2026-27 तक लगभग 10,000 PFAS रसायनों पर प्रतिबंध की तैयारी
विशेषज्ञ मानते हैं कि इन्हीं सख्त नियमों के कारण जोखिमभरा उत्पादन अब उन देशों की ओर शिफ्ट हो रहा है, जहां निगरानी ढांचा विकसित हो रहा है।
❓ बड़ा सवाल
क्या China+1 रणनीति के नाम पर भारत को ‘फॉरएवर केमिकल्स’ का नया ठिकाना बनाया जा रहा है?
और क्या आर्थिक लाभ के बदले पर्यावरणीय जोखिम को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है?
यह सवाल आने वाले वर्षों में भारत की औद्योगिक नीति और पर्यावरण सुरक्षा की असली परीक्षा बनेगा।
