Vulture Conservation News: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) में संकटग्रस्त गिद्धों के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल रंग ला रही है। जंगलों में बनाए गए ‘वल्चर रेस्टोरेंट’ यानी गिद्धों के लिए सुरक्षित भोजन स्थल, इन दुर्लभ पक्षियों के जीवनरक्षक साबित हो रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से न केवल गिद्धों को सुरक्षित और विषमुक्त भोजन मिल रहा है, बल्कि उनकी संख्या में भी स्थिरता देखने को मिल रही है।
🌳 पारंपरिक शव डंपिंग स्थलों को बनाया गया ‘वल्चर रेस्टोरेंट’
आईटीआर क्षेत्र के जंगलों में बसे गांवों के किसान आमतौर पर मवेशियों के शव जंगल के पास पारंपरिक स्थानों पर डालते थे।
लेकिन इन शवों में कई बार दर्द निवारक दवाओं (NSAIDs) का असर रहता था, जो गिद्धों के लिए घातक साबित होता है।
इसी खतरे को देखते हुए, वन विभाग ने ऐसे पारंपरिक शव डंपिंग स्थलों की पहचान कर उन्हें ‘वल्चर रेस्टोरेंट’ के रूप में विकसित किया।
🩺 पशु चिकित्सकों की अहम भूमिका
Vulture Conservation News के अनुसार, अब इन स्थलों पर शव डालने से पहले पशु चिकित्सक उनकी जांच करते हैं।
जो शव विषाक्त पाए जाते हैं, उन्हें हटा दिया जाता है। इस तरह गिद्धों को केवल सुरक्षित और प्राकृतिक भोजन ही उपलब्ध कराया जाता है।
आईटीआर के उप निदेशक संदीप बलगा ने बताया कि अब तक जंगल के भीतर दो पारंपरिक डंप साइट्स को वल्चर रेस्टोरेंट के रूप में विकसित किया गया है।
🤝 ‘वल्चर मित्र’ और वन अमला मिलकर कर रहे काम
गिद्ध संरक्षण के लिए ‘वल्चर मित्र’ टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें और वन अधिकारी गांवों के आसपास के डंपिंग स्थलों की पहचान करते हैं और शवों को जांच के बाद निर्धारित वल्चर रेस्टोरेंट तक पहुंचाते हैं।
इससे मानव हस्तक्षेप भी कम हुआ है, जो गिद्धों के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है।
📡 GPS से हो रही गिद्धों की निगरानी
आईटीआर प्रशासन ने संरक्षण को और मजबूत करने के लिए सैटेलाइट टेलीमेट्री का सहारा लिया है।
कुछ महीने पहले दो गिद्धों को GPS डिवाइस लगाकर छोड़ा गया, जिससे उनके आवागमन पर नजर रखी जा रही है।
इस डेटा से पता चला है कि गिद्धों की आवाजाही करीब 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है, जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमाएं भी शामिल हैं।
अब तीन और गिद्धों को GPS टैग करने की योजना है।
📊 190 से अधिक गिद्ध, उम्मीद बढ़ी
वन विभाग के अनुसार, ताजा जनगणना में इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 190 से अधिक गिद्ध दर्ज किए गए हैं।
अधिकारियों का मानना है कि वल्चर रेस्टोरेंट और तकनीकी निगरानी से आने वाले वर्षों में इनकी संख्या और बढ़ सकती है।
Vulture Conservation News के तहत इंद्रावती टाइगर रिजर्व की यह पहल देशभर के लिए एक मिसाल बन रही है।
सुरक्षित भोजन, समुदाय की भागीदारी और आधुनिक तकनीक के मेल से यह साबित हो गया है कि सही प्रयासों से संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।
