सरकारी डेंटल कॉलेज रायपुर में सस्ती तकनीक से हुआ जटिल चेहरे का पुनर्निर्माण, 24 साल बाद युवक खोल पाया मुंह

Raipur Medical News: राजधानी रायपुर के शासकीय डेंटल कॉलेज (GDC) में डॉक्टरों की एक टीम ने चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। कॉलेज के ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग ने एक 24 वर्षीय युवक के चेहरे और जबड़े का जटिल पुनर्निर्माण कर उसे 24 वर्षों बाद पहली बार बिना रुकावट मुंह खोलने की क्षमता दी है।

यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें महंगी विदेशी तकनीक के बजाय सस्ती स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया।


👶 बचपन की बीमारी बनी जीवनभर की परेशानी

पीड़ित युवक को महज दो साल की उम्र में कान के संक्रमण के बाद टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (TMJ) एंकायलोसिस हो गया था।
इस बीमारी में निचला जबड़ा खोपड़ी से जुड़ जाता है, जिससे मुंह खोलना धीरे-धीरे असंभव हो जाता है।

युवक 12 साल की उम्र में पहली बार GDC रायपुर आया था, लेकिन पारिवारिक कारणों से उस समय सर्जरी नहीं हो सकी।
करीब 12 साल बाद, जब जबड़े की हलचल लगभग समाप्त हो गई, तब वह दोबारा इलाज के लिए लौटा।


🩺 तीन चरणों में हुआ जटिल इलाज

Raipur Medical News के अनुसार, सर्जिकल टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. बीजू पप्पाचन ने इलाज को तीन चरणों में पूरा किया—

पहला चरण:
डिस्ट्रैक्शन ऑस्टियोजेनेसिस तकनीक के जरिए जबड़े की हड्डी को धीरे-धीरे बढ़ाया गया। इसमें स्वदेशी मोनोप्लानर डिस्ट्रैक्टर का इस्तेमाल किया गया।

दूसरा चरण:
छह महीने बाद डिस्ट्रैक्टर हटाकर जॉइंट रिलीज सर्जरी की गई, जिससे युवक ने दो दशकों बाद पहली बार मुंह पूरी तरह खोला

तीसरा चरण:
25 वर्ष की उम्र में अंतिम चरण के तहत एक्सटेंडेड जीनियोप्लास्टी और इलियक क्रेस्ट बोन ग्राफ्टिंग कर चेहरे का संतुलन और ठुड्डी की संरचना बहाल की गई।


💰 सस्ती तकनीक ने रचा इतिहास

इस केस की सबसे बड़ी खासियत रही भारतीय-निर्मित डिस्ट्रैक्टर, जिसकी लागत मात्र

  • ₹5,000 (डिवाइस)
  • ₹2,500 (स्क्रू)

यानी कुल ₹7,500 रही।

जबकि अंतरराष्ट्रीय मल्टी-प्लानर उपकरणों की कीमत ₹3 लाख से ₹6 लाख तक होती है।
डॉ. पप्पाचन के अनुसार, सटीक सर्जिकल प्लानिंग से टीम ने इस सस्ते उपकरण से भी मल्टी-प्लेन जबड़ा विकास सफलतापूर्वक कर दिखाया।


🌍 अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान

डॉ. बीजू पप्पाचन ने बताया कि यह तकनीक हांगकांग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत की जा चुकी है और इसे अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।

उन्होंने कहा,
“कई केंद्र केवल जॉइंट रिलीज करते हैं, लेकिन चेहरे की विकृति सुधारना, जॉइंट को मुक्त करना और बोन ग्राफ्टिंग के जरिए संतुलन बनाना—यह समग्र इलाज गहन योजना और अनुभव मांगता है।”


Raipur Medical News के तहत यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के सरकारी चिकित्सा संस्थानों के लिए प्रेरणादायक है।
सस्ती, स्वदेशी और प्रभावी तकनीक के जरिए जटिल बीमारी का सफल इलाज यह साबित करता है कि संसाधनों की कमी भी नवाचार की राह में बाधा नहीं बन सकती।

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