भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कोशिश तेज, रूस और अमेरिका से कच्चे तेल की साप्ताहिक खरीद पर सरकार की कड़ी नजर

India US trade deal Russian oil। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत तेज होती दिख रही है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने रूस और अमेरिका से होने वाली कच्चे तेल की खरीद (Crude Oil Imports) पर साप्ताहिक निगरानी शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, तेल शोधन कंपनियों से रूसी और अमेरिकी तेल आयात का विस्तृत ब्योरा मांगा गया है।

सरकारी स्तर पर यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब भारत को आशंका है कि आने वाले महीनों में रूस से कच्चे तेल का आयात 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे जा सकता है।


अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता और दबाव

रिपोर्ट के मुताबिक, India US trade deal Russian oil मुद्दा दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत में एक अहम अड़चन बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ा दिए थे। इसकी एक बड़ी वजह भारत द्वारा रूसी तेल की भारी खरीद बताई गई थी।

हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन इसमें समय-समय पर तनाव भी सामने आता रहा है।


यूक्रेन युद्ध के बाद भारत की भूमिका

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वर्ष 2022 से भारत रियायती रूसी समुद्री तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा। इससे भारत की ऊर्जा जरूरतें तो पूरी हुईं, लेकिन पश्चिमी देशों ने इसे लेकर आलोचना भी की। उनका आरोप रहा कि रूसी तेल से मिलने वाला राजस्व युद्ध को बढ़ावा दे रहा है।

इसी कारण रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।


साप्ताहिक डेटा क्यों जरूरी?

तेल मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे रूस और अमेरिका से होने वाले कच्चे तेल के आयात का साप्ताहिक डेटा साझा करें।

एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से Reuters ने कहा—

“हम चाहते हैं कि जब अमेरिका जानकारी मांगे, तो हम सत्यापित और सटीक आंकड़े दे सकें, न कि किसी दूसरे स्रोत पर निर्भर रहें।”

यह पहला मौका है जब भारत में कच्चे तेल के स्रोतों की जानकारी मासिक के बजाय साप्ताहिक रूप से मांगी जा रही है।


रूस से आयात घटने के संकेत

सरकारी सूत्रों के अनुसार, रिफाइनरियों को फिलहाल रूस से तेल खरीद कम करने का कोई औपचारिक निर्देश नहीं दिया गया है। फिर भी, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • रूसी तेल आयात जल्द 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे आ सकता है
  • दिसंबर में आयात घटकर 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया
  • यह आंकड़ा जून के शिखर स्तर से लगभग 40% कम है

डेटा एनालिटिक्स फर्म Kpler के मुताबिक, यह तीन वर्षों का न्यूनतम स्तर है।


कृषि बाजार पर मतभेद भी बाधा

बताया जा रहा है कि जुलाई के अंत में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता उस समय टूट गई, जब भारत ने अपने कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच संवाद जारी रहा और बातचीत फिर से शुरू हुई।

हालांकि, रूसी तेल आयात अब भी समझौते के रास्ते की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।


भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन—दोनों को साधने की कोशिश में है। एक ओर अमेरिका के साथ व्यापार समझौता प्राथमिकता है, तो दूसरी ओर सस्ते रूसी तेल से देश की जरूरतें जुड़ी हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि India US trade deal Russian oil समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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