Balod jail mobile case: छत्तीसगढ़ के बालोद जिला जेल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर चूक का मामला सामने आया है। जेल में की गई सघन तलाशी के दौरान मोबाइल फोन बरामद होने से जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
साइबर सेल और बालोद पुलिस की संयुक्त टीम ने मोबाइल को जब्त कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
जेल के अंदर से मोबाइल मिलने के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
🔍 हत्या की साजिश से जुड़ा है मामला
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, Balod jail mobile case की जांच उस समय तेज हुई जब साइबर सेल और बालोद पुलिस हमर राज पार्टी के जिलाध्यक्ष की हत्या की साजिश से जुड़े मामले की पड़ताल कर रही थी।
इस प्रकरण में पुलिस ने आरोपी मुकेश निर्मलकर को रिमांड पर लिया था। पूछताछ के दौरान मुकेश ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि जेल के अंदर एक मोबाइल फोन छुपाकर रखा गया है, जिसका इस्तेमाल हत्या की साजिश रचने में किया गया।
🚨 बैरक नंबर 6 के सामने मिला मोबाइल
इस इनपुट के बाद पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने जिला जेल में सघन तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान
👉 बैरक नंबर 6 के सामने मिट्टी के ढेर में दबाकर रखा गया एक छोटा मोबाइल फोन
बरामद किया गया।
मोबाइल को साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिया गया है।
एसपी बालोद योगेश पटेल ने बताया,
“मोबाइल फोन को जब्त कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”
🕵️♂️ जेल के अंदर रची जा रही थी साजिश
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद मोबाइल जेल में बंद आदतन बदमाश अश्विनी डड़सेना का था।
अश्विनी इस समय धोखाधड़ी के एक मामले में सजा काट रहा है, लेकिन जेल के भीतर रहते हुए भी वह अपने नेटवर्क के जरिए आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।
पुलिस के अनुसार,
- अश्विनी डड़सेना ने
- अपने सहयोगी मुकेश निर्मलकर
- और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर
हमर राज पार्टी के जिलाध्यक्ष की हत्या की साजिश रची थी।
बताया गया कि 1 दिसंबर को आरोपी योजनाबद्ध तरीके से जिलाध्यक्ष की हत्या के इरादे से निकले थे। जब वे अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके, तो जिलाध्यक्ष की कार में आग लगा दी गई।
इस मामले में अश्विनी डड़सेना, मुकेश निर्मलकर सहित सभी आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
📱 मोबाइल की तकनीकी जांच जारी
Balod jail mobile case में साइबर सेल द्वारा मोबाइल की तकनीकी जांच कराई जा रही है।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मोबाइल का इस्तेमाल हत्या की साजिश रचने और संपर्क साधने के लिए किया गया था।
एसपी योगेश पटेल ने बताया,
“मामले में जेल प्रशासन से भी रिपोर्ट तलब की गई है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।”
⚠️ जेल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
जेल के अंदर से मोबाइल फोन का मिलना सुरक्षा में भारी चूक माना जा रहा है।
इस घटना के बाद
- जेल अधीक्षक
- और जेल कर्मचारियों की कार्यप्रणाली
पर सवाल उठने लगे हैं। यह मामला न केवल जेल प्रशासन, बल्कि पुलिस प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
Balod jail mobile case ने यह साफ कर दिया है कि यदि जेल सुरक्षा में थोड़ी भी लापरवाही हो, तो अपराधी सलाखों के पीछे से भी गंभीर वारदातों की साजिश रच सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
