China Claims India Pakistan Mediation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब चीन ने भी भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव में शांति मध्यस्थता का श्रेय लेने की कोशिश की है। हालांकि, भारत ने इस दावे को सख्ती से खारिज करते हुए दोहराया है कि भारत-पाकिस्तान मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।
इस बयान के बाद China Claims India Pakistan Mediation एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
🇨🇳 बीजिंग का दावा: हमने तनाव कम कराया
बीजिंग में आयोजित “अंतरराष्ट्रीय स्थिति और चीन की विदेश नीति” संगोष्ठी में बोलते हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इस साल सबसे ज्यादा स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष देखने को मिले।
उन्होंने दावा किया कि चीन ने कई वैश्विक संकटों में मध्यस्थता की, जिनमें
- भारत-पाकिस्तान तनाव
- उत्तरी म्यांमार
- ईरानी परमाणु मुद्दा
- फिलिस्तीन-इजराइल संघर्ष
- कंबोडिया-थाईलैंड विवाद
शामिल हैं।
वांग यी ने कहा कि चीन ने “लक्षणों के साथ-साथ मूल कारणों” को सुलझाने पर ध्यान दिया।
🇮🇳 भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने चीन के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। नई दिल्ली पहले ही साफ कर चुकी है कि
भारत-पाक सैन्य टकराव का समाधान दोनों देशों के डीजीएमओ (Director General of Military Operations) के बीच सीधी बातचीत से हुआ।
विदेश मंत्रालय ने 13 मई की ब्रीफिंग में बताया था कि
- संघर्षविराम की तारीख, समय और शब्दावली
- 10 मई 2025 को दोपहर 3:35 बजे
- दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच फोन कॉल में तय हुई
भारत का रुख लगातार यही रहा है कि भारत-पाकिस्तान मामलों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।
🔥 ऑपरेशन सिंदूर और चीन की भूमिका
7 से 10 मई के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की भूमिका पर भी सवाल उठे।
भारत ने आरोप लगाया कि
- चीन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता दी
- बीजिंग और इस्लामाबाद की नजदीकी ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया
हालांकि चीन ने भारत के उस आरोप पर सीधे जवाब नहीं दिया, जिसमें कहा गया था कि बीजिंग ने इस संघर्ष को “लाइव लैब” की तरह इस्तेमाल किया।
भारतीय सेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने आरोप लगाया कि चीन ने अपनी प्राचीन रणनीति “36 स्ट्रैटेजम्स” के तहत पाकिस्तान को समर्थन दिया।
🗣️ चीन का संतुलन साधने का प्रयास
राजनयिक स्तर पर, चीन ने 7 मई को भारत-पाकिस्तान दोनों से संयम बरतने की अपील की थी।
हालांकि, उसने भारत की एयरस्ट्राइक को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया, लेकिन आतंकवाद के विरोध की बात भी दोहराई।
🤝 भारत-चीन रिश्तों पर क्या बोले वांग यी
वांग यी ने अपने भाषण में भारत-चीन संबंधों में सुधार के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया
- भारत-चीन रिश्तों में “अच्छी गति” देखने को मिली
उन्होंने दावा किया कि पड़ोसी देशों के साथ चीन का जुड़ाव अब “साझा भविष्य वाले समुदाय” के नए चरण में प्रवेश कर चुका है।
🌍 अमेरिका और वैश्विक राजनीति पर टिप्पणी
वांग यी ने अमेरिकी टैरिफ नीति की आलोचना करते हुए कहा कि
- व्यापार युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया
- चीन और अमेरिका के रिश्ते दुनिया के भविष्य को दिशा देंगे
उन्होंने कहा कि मतभेदों के बावजूद संवाद और सहयोग जरूरी है।
China Claims India Pakistan Mediation का दावा कूटनीतिक स्तर पर बड़ा जरूर है, लेकिन भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है।
भारत-पाकिस्तान के बीच शांति या संघर्ष का फैसला सीधी बातचीत से ही होता है, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से।
