Chhattisgarh government employees strike रायपुर। अपनी 11 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ के लगभग 4 लाख 50 हजार सरकारी कर्मचारी तीन दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी एवं अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले प्रदेशभर के अधिकारी और कर्मचारी धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में शासकीय कामकाज पर व्यापक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
वेतन विसंगति और डीए बना बड़ा मुद्दा
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि सरकार बनने के दो साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादों को अमल में नहीं लाया गया।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार:
- वेतन विसंगति अब भी बनी हुई है
- केंद्र के समान डीए नहीं दिया जा रहा
- लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स का भुगतान नहीं हुआ
इसी वजह से कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
ये हैं कर्मचारियों की 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें
फेडरेशन द्वारा रखी गई प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- केंद्र के समान देय तिथि से डीए
- रुका हुआ डीए एरियर्स का भुगतान
- पिंगुआ कमेटी रिपोर्ट सार्वजनिक करना
- चार स्तरीय वेतनमान लागू करना
- कैशलेस चिकित्सा सुविधा
- मोदी की गारंटी के वादों को पूरा करना
कर्मचारियों का कहना है कि ये मांगें नई नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से लंबित हैं।
सरकार पर असंवेदनशीलता का आरोप
आंदोलनरत कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रवैया नहीं अपना रही है।
उनका कहना है कि बार-बार ज्ञापन और बातचीत के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे नाराजगी बढ़ती गई।
अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
छत्तीसगढ़ कर्मचारी एवं अधिकारी फेडरेशन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तीन दिवसीय हड़ताल के बाद भी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जाएगा।
फेडरेशन का कहना है कि यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई है, जिसे आखिरी दम तक लड़ा जाएगा।
