Chhattisgarh child success story रायपुर। जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम झुलन (पकरिया) निवासी 12 वर्षीय गणेश कश्यप का बचपन संघर्षों में बीता।
गणेश बहु दिव्यांगता, अल्प मानसिक मंदता और सेरेब्रल पाल्सी (हेमीप्लेजिया) से ग्रसित है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसके माता-पिता रोज़गार की तलाश में दूसरे प्रदेशों में मजदूरी करने जाते थे। ऐसे हालात में गणेश की पढ़ाई लगभग ठप हो गई थी।
शासन की संवेदनशील पहल से मिली नई राह
जब हालात सबसे कठिन थे, तब समाज कल्याण विभाग की संवेदनशील सोच गणेश के जीवन में उम्मीद की किरण बनकर आई।
जांजगीर स्थित शासकीय बहु दिव्यांग गृह सह छात्रावास में उसे प्रवेश मिला। यहां 50 बहु दिव्यांग बच्चों को निःशुल्क आवास, भोजन, विशेष शिक्षण और प्रशिक्षण की सुविधा दी जाती है।
विशेष प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
छात्रावास में गणेश को विशेष शिक्षकों के मार्गदर्शन में पढ़ाई के साथ-साथ:
- सामाजिक व्यवहार
- आत्मनिर्भरता
- स्वयं के दैनिक कार्य करने का प्रशिक्षण
दिया गया।
लगातार प्रयासों से उसके असामान्य व्यवहार में सुधार आया और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। धीरे-धीरे उसकी सीखने की क्षमता बेहतर होती गई।
मुख्यधारा में समावेशन की मिसाल
समाज कल्याण विभाग के उद्देश्य के अनुरूप गणेश को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास सफल रहा।
सत्र 2024-25 में गणेश ने सामान्य स्कूल से कक्षा 5वीं की परीक्षा दी और सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। यह उपलब्धि न केवल गणेश, बल्कि पूरे संस्थान के लिए गर्व का क्षण रही।

आज कक्षा 6वीं का नियमित छात्र
वर्तमान में गणेश शासकीय माध्यमिक शाला, पेण्ड्री में कक्षा 6वीं का नियमित छात्र है।
वह आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई कर रहा है। शिक्षकों के अनुसार, गणेश की प्रगति संतोषजनक है और उसका भविष्य उज्ज्वल नजर आ रहा है।
माता-पिता की आंखों में खुशी और भरोसा
अपने बच्चे को सामान्य स्कूल में पढ़ते और आगे बढ़ते देखकर गणेश के माता-पिता भावुक हैं।
उन्होंने समाज कल्याण विभाग और शासकीय बहु दिव्यांग गृह सह छात्रावास के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से उनके बेटे को नई पहचान और नया भविष्य मिला है।
