रायपुर | छत्तीसगढ़
Chhattisgarh Doctors Protest: छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों के आंदोलन को अब डॉक्टरों का भी खुला समर्थन मिल गया है।
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDA) ने 29, 30 और 31 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित तीन दिवसीय सामूहिक अवकाश और आंदोलन का समर्थन करते हुए राज्यभर के डॉक्टरों से एकजुट होने की अपील की है।
यह आंदोलन छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन द्वारा बुलाया गया है, जिसमें प्रदेश की 118 कर्मचारी संगठनों की भागीदारी तय मानी जा रही है।
🩺 सभी वर्ग के डॉक्टरों से जुड़ा है आंदोलन
CIDA ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है।
इसमें नियमित, संविदा, अस्थायी, बॉन्डेड और एड-हॉक डॉक्टरों सहित सभी श्रेणियों के चिकित्सकों के हित जुड़े हुए हैं।
एसोसिएशन ने कहा कि फेडरेशन की मांगें व्यापक हैं और इनका सीधा संबंध राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती से है।
✊ आंदोलन का उद्देश्य सिर्फ मांग नहीं, संगठन की ताकत दिखाना
CIDA ने अपने बयान में कहा—
“हर आंदोलन से सभी मांगें तुरंत पूरी हों, यह जरूरी नहीं।
आंदोलन का मूल उद्देश्य यह दिखाना होता है कि संगठन कितना संगठित, एकजुट और मजबूत है।”
एसोसिएशन के अनुसार,
जब किसी आंदोलन में बड़ी संख्या में डॉक्टर सक्रिय भागीदारी करते हैं, तब ही मंत्री, नौकरशाह, वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, मीडिया और आम जनता उस आवाज़ को गंभीरता से सुनती है।
🏥 स्थानीय से राज्य स्तर तक असर
CIDA का कहना है कि—
- स्थानीय स्तर पर आंदोलन से संगठन की सक्रियता मापी जाती है
- जिला स्तर पर प्रशासन की प्रतिक्रिया सामने आती है
- और राज्य स्तर पर सरकार की नीतियों पर दबाव बनता है
अगर डॉक्टर अपनी सामूहिक शक्ति का आकलन करना चाहते हैं, तो यह आंदोलन एक बेहतर अवसर है।
📢 “कलम छोड़ो, आवाज़ उठाओ — मोदी की गारंटी लागू करो”
डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सभी चिकित्सकों से आह्वान किया है कि—
- 29, 30 और 31 दिसंबर को सामूहिक अवकाश लें
- एक मंच पर, एक आवाज़ में आंदोलन में शामिल हों
यह नारा सीधे “मोदी की गारंटी” से जुड़ा है।
🔍 क्या है ‘मोदी की गारंटी’?
‘मोदी की गारंटी’ वह चुनावी आश्वासन है,
जो 2023 छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी ने दिया था।
इसमें शामिल था—
- संविदा और अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण
- सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तों में सुधार
- स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बेहतर कार्य वातावरण
अब डॉक्टर और कर्मचारी संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं कि
चुनावी वादों को जमीन पर उतारा जाए, न कि सिर्फ भाषणों तक सीमित रखा जाए।
🧩 आंदोलन का असर स्वास्थ्य व्यवस्था पर?
हालांकि, CIDA ने संकेत दिया है कि
आपातकालीन सेवाएं प्रभावित न हों, इस पर संगठन स्तर पर चर्चा की जा रही है।
फिर भी, बड़े पैमाने पर डॉक्टरों की भागीदारी से आंदोलन का असर व्यापक हो सकता है।
