रायपुर।
Raipur police action protest: राजधानी रायपुर में गुरुवार 23 दिसंबर 2025 को पुलिस प्रशासन द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई ने मुस्लिम समाज को गहरी चिंता और पीड़ा में डाल दिया है। समाज का आरोप है कि पूछताछ के नाम पर सैकड़ों मुस्लिम परिवारों के बुजुर्गों, महिलाओं और प्रतिष्ठित नागरिकों को बिना स्पष्ट कारण हिरासत में लिया गया, जिससे पूरे समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया।
पूछताछ पर नहीं, तरीके पर आपत्ति
मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें पूछताछ या जांच की प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि यह कानून-व्यवस्था का हिस्सा है।
हालांकि, जिस तरीके से आधी रात घरों से बुजुर्ग महिलाओं और 70 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को उठाया गया, वह असंवेदनशील, अपमानजनक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया।
समाज ने सवाल उठाया कि जब नोटिस, समन और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं उपलब्ध थीं, तो उनका उपयोग क्यों नहीं किया गया।
प्रतिष्ठित नागरिकों की छवि को ठेस
इस कार्रवाई में जिन लोगों को हिरासत में लिया गया, वे समाज में सम्मानित, शिक्षित और जिम्मेदार नागरिक माने जाते हैं।
समाज का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से मुस्लिम समाज की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और भय का वातावरण बनाने का प्रयास हुआ।
जब समाज के जिम्मेदार लोगों के साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो उसका असर केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समुदाय के आत्मसम्मान को चोट पहुंचती है।
120 लोगों से पूछताछ, कोई दोषी नहीं
उल्लेखनीय है कि करीब 120 लोगों से पूछताछ के बाद एक भी व्यक्ति दोषी नहीं पाया गया।
सभी ने अपने वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया।
यह तथ्य स्वयं इस कार्रवाई की आवश्यकता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
शांतिपूर्ण धरना और ज्ञापन की घोषणा
मुस्लिम समाज ने स्पष्ट किया है कि वह संविधान और कानून का सम्मान करता है, लेकिन इस तरह की कार्रवाइयों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
इसी क्रम में समाज द्वारा 26 दिसंबर 2025 (भुमआ), दोपहर 2:30 बजे,
राजीव गांधी चौक, रायपुर में एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करने और
माननीय राज्यपाल, छत्तीसगढ़ को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की गई है।
समाज की प्रमुख मांगें
- पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा की जाए
- बिना ठोस कारण हिरासत में लिए गए लोगों को सम्मानपूर्वक राहत दी जाए
- भविष्य में पूछताछ की प्रक्रिया में मानवीय, संवैधानिक और कानूनी तरीकों का पालन सुनिश्चित किया जाए
समाज ने दोहराया कि यह आवाज़ किसी टकराव या अराजकता के लिए नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाई जा रही है।
समाज की प्रमुख मांगें
- पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा की जाए
- बिना ठोस कारण हिरासत में लिए गए लोगों को सम्मानपूर्वक राहत दी जाए
- भविष्य में पूछताछ की प्रक्रिया में मानवीय, संवैधानिक और कानूनी तरीकों का पालन सुनिश्चित किया जाए
समाज ने दोहराया कि यह आवाज़ किसी टकराव या अराजकता के लिए नहीं, बल्कि न्याय, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाई जा रही है।
यह मामला केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक अधिकार, सम्मान और कानून के संतुलित प्रयोग से जुड़ा सवाल है। समाज का कहना है कि सुरक्षा और जांच जरूरी है, लेकिन सम्मान के साथ।
अब सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम और इस मामले में पुलिस की आधिकारिक सफाई पर टिकी हैं।
