Assam Karbi Anglong violence ने एक बार फिर पूर्वोत्तर भारत की जटिल भूमि राजनीति और आदिवासी अधिकारों को केंद्र में ला दिया है।
असम के कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में लंबे समय से चले आ रहे भूमि अतिक्रमण विवाद ने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया।
इस हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 45 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें 38 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
🚔 कहां और कैसे भड़की हिंसा?
हिंसा की शुरुआत खेरेनी (Kheroni) इलाके से हुई, जो बाद में डोंगकामुकाम (Dongkamukam) तक फैल गई।
उग्र भीड़ ने कई घरों, दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया।
प्रदर्शनकारियों ने कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) के प्रमुख तुलिराम रोंगहांग के पैतृक घर को भी आग के हवाले कर दिया।
🌾 भूमि विवाद बना हिंसा की जड़
इस पूरे आंदोलन की जड़ Village Grazing Reserve (VGR) और Professional Grazing Reserve (PGR) भूमि से जुड़ी है।
ये ज़मीनें संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा के लिए संरक्षित हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 7,184 एकड़ से अधिक भूमि पर अतिक्रमण हुआ है और प्रशासन इस पर कार्रवाई नहीं कर रहा।
🗣️ अफवाहों ने बढ़ाया तनाव
स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब भूख हड़ताल पर बैठे 9 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने मेडिकल जांच के लिए उठाया।
उनकी गिरफ्तारी की अफवाह फैलते ही लोगों में गुस्सा भड़क उठा और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गया।
🚫 इंटरनेट बंद, निषेधाज्ञा लागू
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने:
- कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं
- BNSS की धारा 163 लागू की
- 5 या अधिक लोगों के एकत्र होने, रैलियों और जुलूसों पर रोक लगाई
- शाम 5 बजे से सुबह 6 बजे तक आवागमन सीमित किया
हालांकि वॉइस कॉल और ब्रॉडबैंड सेवाएं चालू रखी गई हैं।

🏛️ प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
आईजीपी (कानून-व्यवस्था) अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने:
- अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की घोषणा की
- मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई
- कहा कि वह स्थिति पर खुद नजर बनाए हुए हैं
⚖️ अदालत में भी उलझा है मामला
इस भूमि विवाद से जुड़े कई मामले गुवाहाटी हाईकोर्ट में लंबित हैं।
अदालत द्वारा बेदखली पर रोक (Stay) लगाए जाने से स्थिति और जटिल हो गई है।
🔍 बड़ा सवाल: समाधान कब?
Assam Karbi Anglong violence सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आदिवासी भूमि अधिकार, प्रशासनिक पारदर्शिता और संवाद की कमी को उजागर करता है।
जब तक संवेदनशील इलाकों में भरोसे और संवाद से समाधान नहीं निकाला जाएगा, तब तक ऐसे विस्फोट दोहराते रहेंगे।
कार्बी आंगलोंग की हिंसा ने दिखा दिया कि भूमि जैसे संवेदनशील मुद्दों को बल नहीं, बल्कि बातचीत और कानून के रास्ते सुलझाने की जरूरत है।
अब देखना होगा कि शांति बहाल होने के बाद सरकार इस पुराने विवाद का स्थायी समाधान कैसे निकालती है।
