ओडिशा की नई नीति से प्रभावित होकर छत्तीसगढ़ के 22 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, इनाम राशि 2 करोड़ से अधिक

Odisha Maoist surrender policy: देश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ निर्णायक दौर के बीच ओडिशा सरकार की संशोधित आत्मसमर्पण नीति ने बड़ा असर दिखाया है।
Odisha Maoist surrender policy के तहत आकर्षक पुनर्वास पैकेज से प्रभावित होकर छत्तीसगढ़ के 22 नक्सलियों ने मंगलवार को ओडिशा में हथियार डाल दिए। यह इस वर्ष राज्य में पहला सामूहिक आत्मसमर्पण है।


📍 कहां और कब हुआ आत्मसमर्पण?

यह आत्मसमर्पण भुवनेश्वर और मलकानगिरी क्षेत्र में हुआ।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना केंद्र सरकार द्वारा तय की गई देश से वामपंथी उग्रवाद समाप्त करने की समय-सीमा से करीब तीन महीने पहले हुई है, जिसे एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।


💰 नई नीति बनी बड़ा कारण

पुलिस महानिदेशक वाई.बी. खुरानिया ने बताया कि:

  • ओडिशा की नई नीति में इनाम और पुनर्वास पैकेज छत्तीसगढ़ की तुलना में करीब 20% अधिक है
  • इससे ओडिशा, नक्सल आत्मसमर्पण के लिए सबसे आकर्षक राज्य बनकर उभरा है
  • आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल इनाम 2 करोड़ रुपये से अधिक था

👩‍🦰 महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी

इन 22 नक्सलियों में:

  • 10 महिलाएं शामिल हैं
  • यह दर्शाता है कि उग्रवाद से जुड़ी महिलाएं भी अब मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुन रही हैं

🔫 हथियार और विस्फोटक भी सौंपे

आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को:

  • 9 आधुनिक हथियार
    • 1 AK-47
    • 2 INSAS राइफल
    • 1 सेल्फ-लोडिंग राइफल
    • 3 .303 राइफल
    • 2 सिंगल शॉट हथियार
  • 150 राउंड गोलियां
  • 20 किलोग्राम विस्फोटक सौंपे

यह आत्मसमर्पण संगठन की सैन्य क्षमता पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।


🕊️ हिंसा छोड़ लोकतंत्र पर भरोसा

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने:

  • हिंसा से पूरी तरह नाता तोड़ने
  • CPI (माओवादी) संगठन से संबंध समाप्त करने
  • भारतीय लोकतंत्र और संविधान में विश्वास जताने की शपथ ली

खुरानिया ने कहा कि यह घटना CPI (Maoist) के नेतृत्व, मनोबल और ऑपरेशनल क्षमता के लिए गंभीर झटका है।


📊 आंकड़े बताते हैं लंबी सफलता

सरकारी आंकड़ों के अनुसार:

  • 2006 से दिसंबर 2025 तक,
  • ओडिशा में 610 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया
  • इनमें अधिकांश राज्य, डिवीजन और एरिया कमेटी स्तर के सक्रिय सदस्य थे

यह निरंतर रणनीति की सफलता को दर्शाता है।


🔚नीति + विश्वास = बदलाव

Odisha Maoist surrender policy यह साबित करती है कि
केवल बंदूक नहीं, बल्कि विश्वसनीय पुनर्वास, सम्मान और सुरक्षित भविष्य की पेशकश भी उग्रवाद के खिलाफ प्रभावी हथियार बन सकती है।

यह आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षा बलों की सफलता है, बल्कि शांति, विकास और लोकतंत्र की जीत भी है।

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