कोलकाता में मेसी का कार्यक्रम बना अव्यवस्था का शिकार, भीड़ और कुप्रबंधन से 10 मिनट में मैदान छोड़ा

कोलकाता।
दुनिया के महान फुटबॉल खिलाड़ियों में शुमार लियोनेल मेसी का कोलकाता दौरा, जो यादगार बनने वाला था, वह अव्यवस्था और कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गया। दिसंबर 2025 में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों फुटबॉल प्रेमी अपने पसंदीदा खिलाड़ी की एक झलक पाने पहुंचे थे, लेकिन अधिकांश दर्शकों को निराश होकर लौटना पड़ा।

⚠️ भीड़ और कुप्रबंधन ने बिगाड़ा माहौल

स्टेडियम में कार्यक्रम शुरू होते ही हालात बेकाबू हो गए।
आरोप है कि—

  • मैदान पर वीवीआईपी, अधिकारी और आयोजक जरूरत से ज्यादा मौजूद थे
  • आम दर्शकों की दृश्य-रेखा पूरी तरह बाधित हो गई
  • सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ने लगी

इससे न केवल दर्शकों में नाराजगी फैली, बल्कि खिलाड़ियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए

⏱️ 10 मिनट में मैदान छोड़ने को मजबूर हुए मेसी

स्थिति बिगड़ती देख लियोनेल मेसी, उनके साथी खिलाड़ी लुइस सुआरेज़ सहित अन्य सदस्यों को 10 मिनट से भी कम समय में मैदान से बाहर निकाल लिया गया
बताया जा रहा है कि बढ़ती अव्यवस्था और संभावित सुरक्षा खतरे के कारण यह फैसला लिया गया।

😡 फूटा फैंस का गुस्सा

मेसी को जल्दी जाते देख दर्शकों का गुस्सा फूट पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार—

  • कुछ दर्शकों ने नारेबाजी और हूटिंग की
  • बोतलें फेंकी गईं
  • स्टेडियम की कुर्सियों और बैनरों को नुकसान पहुंचाया गया

जिस आयोजन को उत्सव बनना था, वह देखते ही देखते अराजकता में बदल गया

🌆 हैदराबाद में रहा बिल्कुल उलटा नजारा

इसी GOAT Tour के तहत मेसी का हैदराबाद दौरा पूरी तरह सफल बताया गया।
वहां—

  • बेहतर भीड़ नियंत्रण रहा
  • फैंस को खिलाड़ियों से जुड़ने का मौका मिला
  • आयोजन को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली

इस तुलना ने कोलकाता आयोजन की तैयारियों पर और भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

📰 पीआर डिजास्टर बना आयोजन

यह घटना न सिर्फ आयोजकों के लिए, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिहाज से भी नुकसानदायक साबित हुई।
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे “Public Relations Disaster” करार दिया है, जिससे मेसी की यात्रा का असली उद्देश्य कहीं पीछे छूट गया।

🔍 सबक क्या?

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के आयोजनों में
  • सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और दर्शक अनुभव सर्वोपरि होना चाहिए

अन्यथा ऐसे आयोजन लोकप्रियता बढ़ाने की बजाय नकारात्मक सुर्खियां बन जाते हैं।