कोरबा |
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में Korba religious conversion case सामने आने के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई है। कटघोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक गांव में आयोजित प्रार्थना सभा के बाद स्थानीय लोगों ने धर्मांतरण के आरोप लगाए हैं। मामले में पुलिस ने पादरी समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
खुले मैदान में आयोजित हुई थी प्रार्थना सभा
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रार्थना सभा रविवार सुबह (14 दिसंबर) को कोरबा जिले के सुतर्रा गांव में आयोजित की गई थी। कार्यक्रम सोनाडुला पुलिस चौकी क्षेत्र में आता है।
खुले खेत में अस्थायी पंडाल लगाकर बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा किया गया था। सभा का नेतृत्व पादरी बजरंग जायसवाल कर रहे थे।
बीमार और गरीब लोगों को बनाया गया निशाना?
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सभा के दौरान—
- बीमार लोगों को चमत्कारी इलाज का दावा किया गया
- निःसंतान दंपतियों और गरीब परिवारों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया गया
- धर्म परिवर्तन के लिए मानसिक दबाव बनाया गया
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के दावे कमजोर और संकटग्रस्त लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।
सरपंच ने जताई आपत्ति, पुलिस में दी शिकायत
गांव की सरपंच संतोषी बाई को जब इस सभा की जानकारी मिली, तो उन्होंने कार्यक्रम पर आपत्ति जताई।
इसके बाद उन्होंने कटघोरा थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
सरपंच का कहना है कि गांव में पहले भी ऐसी गतिविधियों को लेकर असहजता रही है और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा है।
पादरी के खिलाफ मामला दर्ज
शिकायत मिलने के बाद दोनों पक्षों के लोग कटघोरा थाने पहुंचे।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने पादरी बजरंग जायसवाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों का दावा है कि पादरी पहले भी ऐसे मामलों में विवादों में रह चुके हैं और उन्हें बिना अनुमति कार्यक्रम न करने की चेतावनी दी गई थी।
पुलिस ने सरपंच की शिकायत के आधार पर पादरी बजरंग जायसवाल और अन्य के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस का बयान: निष्पक्ष जांच जारी
कटघोरा थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी ने बताया कि—
- दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं
- मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की जा रही है
- जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी
उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह न फैलाने की अपील की है।
इलाके में तनाव, प्रशासन सतर्क
घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन की कोशिश है कि मामला कानूनी दायरे में रहते हुए सुलझाया जाए और सामाजिक शांति बनी रहे।
Korba religious conversion case एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि धार्मिक गतिविधियों की आड़ में यदि कानून का उल्लंघन होता है, तो उस पर सख्ती जरूरी है।
अब सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि आरोप कितने सही हैं और आगे क्या कार्रवाई होगी।
