राज्य के किसानों को हुआ 634 करोड़ का फसल बीमा दावा भुगतान, 15 जुलाई तक होगा खरीफ फसलों का बीमा

Alok 18 2

रायपुर (छत्तीसगढ़)। राज्य के 4 लाख 56 हजार कृषकों को 634 करोड़ 13 लाख रूपए का फसल बीमा दावा का भुगतान किया जा चुका है। यह दावा राशि खरीफ मौसम 2019 में बीमित फसलों क्षतिपूर्ति के एवज में किसानों को भुगतान की गई है। राज्य में रबी सीजन 2019-20 की फसलों की क्षतिपूर्ति के लिए भी किसानों को दावा राशि का भुगतान शुरू कर दिया गया है। राज्य के मुंगेली, कबीरधाम एवं बलरामपुर जिले के 2665 कृषकों को रबी फसलों के नुकसान के एवज में अब तक 2 करोड़ 59 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है।

PicsArt 04 04 06.30.09

कृषि उत्पादन आयुक्त मनिन्दर कौर द्विवेदी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार अब सभी प्रकार के किसानों के लिए फसल बीमा कराना ऐच्छिक कर दिया गया है। इससे पूर्व ऋणी कृषकों का अनिर्वाय रूप से फसल बीमा किया जाता था। उन्होंने बताया कि जलवायु में हो रहे परिवर्तन के कारण बीते 2-3 सालों में हुई अनियमित, असामायिक वर्षा एवं ओलावृष्टि की वजह से फसलों को बहुत नुकसान होता रहा है। विशेषकर उद्यानिकी फसलें आंधी-तूफान, असामायिक वर्षा एवं ओलावृष्टि से प्रभावित हुई है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक जोखिम से आर्थिक सुरक्षा हेतु फसल बीमा जरूरी है। ज्ञातव्य है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत कृषकों को खरीफ फसल के लिए मात्र दो प्रतिशत प्रीमियम राशि का भुगतान करना होता है। किसान अपने निकटतम सहकारी बैंक, ग्रामीण बैंक, व्यवसायिक बैंक अथवा कॉमन सर्विस सेन्टर में 15 जुलाई के पूर्व फसल बीमा आवदेन एवं प्रीमियम राशि जमा कर फसलों को बीमित करा सकेंगे।
रबी फसल का भुगतान शीघ्र
छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ सीजन 2019 में 15 लाख 53 हजार किसानों ने फसल बीमा कराया था। जिसमें से 4 लाख 56 हजार प्रभावित कृषकों को 634 करोड़ 13 लाख रूपए का दावा राशि भुगतान की गई है। रबी सीजन 2019-20 में राज्य के एक लाख 44 हजार किसानों ने फसल बीमा कराया है। अभी हाल ही में आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की वजह से रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। रबी फसलों के नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। कुछ जिलों में दावा राशि का भुगतान भी फसल के नुकसान का आंकलन उपरांत शुरू कर दिया गया है। राज्य में रबी फसलों के नुकसान को देखते हुए यह अनुमान है कि कृषकों को करोड़ों रूपए की दावा राशि का भुगतान होगा।