छत्तीसगढ़ CG Land Rate बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रदेश के कई शहरों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कहीं पुतला दहन हुआ, तो कहीं प्रेसवार्ता कर सरकार पर सीधा हमला बोला गया। जमीन की सरकारी गाइडलाइन दरों में 20% से 100% तक की बढ़ोतरी के बाद आम लोगों और कारोबारियों में नाराज़गी है।
जांजगीर-चांपा में कांग्रेस की प्रेसवार्ता, आर्थिक मंदी आने की आशंका
जांजगीर-चांपा में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कहा कि CG Land Rate बढ़ने से प्रदेश में आर्थिक मंदी गहराएगी और बेरोजगारी में भी इजाफा होगा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नई गाइडलाइन दरें आम आदमी के घर के सपने को तोड़ रही हैं।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि—
- प्रदेश सरकार ने जमीन की कीमतें बढ़ाकर लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
- गाइडलाइन दरें 20% से 100% तक बढ़ाई गई हैं, जो अस्वीकार्य है।
- गाइडलाइन वापस नहीं ली गई तो आंदोलन और भी तेज किया जाएगा।
राजनांदगांव में पुतला दहन, पुलिस-प्रदर्शनकारी आमने-सामने
राजनांदगांव के महाकाल चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट हुए और जमीन दर बढ़ोतरी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
यहां कांग्रेसियों ने प्रदेश सरकार का पुतला दहन किया।
पुलिस ने प्रदर्शन रोकने की कोशिश की, लेकिन भीड़ बढ़ने से कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।
स्थानीय नेताओं ने कहा,
“गरीब और मध्यम वर्ग की जमीन खरीदने की क्षमता खत्म हो जाएगी, सरकार सिर्फ रियल एस्टेट माफिया को फायदा पहुंचा रही है।”
रायपुर में जमीन की कीमत सात गुना, रजिस्ट्री फीस 3 लाख से बढ़कर 22 लाख!
सबसे बड़ा असर रायपुर जिले के निमोरा और बेंद्री जैसे क्षेत्रों में देखा जा रहा है। यहां सरकारी CG Land Rate अचानक इतना बढ़ा है कि जमीन खरीदना अब कई गुना महंगा हो गया है।
पहले क्या था और अब क्या हुआ?
- पहले गाइडलाइन रेट: 600 रुपये/वर्गफीट
- अब गाइडलाइन रेट: 4200 रुपये/वर्गफीट
- 5000 वर्गफीट जमीन की संभावित कीमत पहले: 30 लाख रुपये
- पुराने रेट पर रजिस्ट्री फीस: 3.15 लाख रुपये
- नए रेट पर रजिस्ट्री फीस: 22 लाख रुपये
यह आंकड़े दिखाते हैं कि जमीन के साथ-साथ रजिस्ट्री पर लगने वाला बोझ भी कई गुना बढ़ गया है।
दुर्ग में जमीन कारोबारी और CREDAI की कोर्ट जाने की तैयारी
दुर्ग में जमीन कारोबारी और CREDAI इस बढ़ोतरी को लेकर न्यायालय में याचिका दाखिल करने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि यह बदलाव रियल एस्टेट कारोबार को भारी नुकसान पहुंचाएगा और प्रोजेक्ट्स ठप होने का खतरा बढ़ जाएगा।
