भारत की दृष्टिबाधित महिला टीम ने जीता पहला T20 विश्व कप: सीएम विष्णुदेव साय ने दी बधाई, दीपिका टीसी की टीम टूर्नामेंट में रही अपराजित

रायपुर (छत्तीसगढ़), 24 नवंबर। भारत की दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रचते हुए महिलाओं के पहले T20 विश्व कप (Blind Cricket) का खिताब अपने नाम कर लिया है। कोलंबो में खेले गए फाइनल मुकाबले में टीम ने नेपाल को 7 विकेट से हराकर टूर्नामेंट के उद्घाटन संस्करण की चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

इस ऐतिहासिक जीत के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारतीय टीम को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने पूरे देश का मान बढ़ाया है।
उन्होंने कहा, “मैं भारतीय टीम को बधाई देता हूँ, उन्होंने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।”


फाइनल में दमदार प्रदर्शन, नेपाल 114/5 पर रोका

भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी और शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा। भारतीय गेंदबाजों ने सटीक लाइन और लेंथ के साथ नेपाल को 20 ओवर में 114/5 पर रोक दिया।

रन चेज में भारत ने शानदार शुरुआत की और महज 10 ओवर में 100 रन पूरे कर लिए।

फुला सारेन और करुणा के दम पर आसान जीत

ओपनर फुला सारेन ने 27 गेंदों में 44 रनों की मैच-विजेता पारी खेली।
उन्होंने चार चौकों के साथ टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई और उनकी शानदार पारी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

वहीं करुणा के ने भी 27 गेंदों में 42 रन बनाते हुए टीम की जीत सुनिश्चित कर दी।
भारत ने लक्ष्य को 13वें ओवर में आसानी से हासिल किया।


कप्तान दीपिका टीसी बोलीं— “हम पुरुष टीम से खेलने के लिए भी तैयार”

जीत के बाद कप्तान दीपिका टीसी ने गर्व से कहा:
“हम बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं। यह बहुत बड़ी जीत है। हमारी पूरी टीम ने बेहद मेहनत की है। हमारी टीम इतनी मजबूत है कि बाकी टीमें हमसे खेलने से डरती हैं। हम पुरुष टीम से खेलने के लिए भी तैयार हैं।”

उनके शब्दों में भारतीय टीम की आत्मविश्वास और एकता साफ झलकती है।


पूरे टूर्नामेंट में भारत रहा अपराजित

भारत ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं हारा।

यह रहा उनका विजयी सफर—

  • श्रीलंका के खिलाफ पहले मैच में शानदार जीत
  • ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 293 रन के लक्ष्य के बावजूद 57 रनों से जीत
  • पाकिस्तान को 10.2 ओवर में ही 136 रन का लक्ष्य चेज किया
  • सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 9 विकेट से हराया
  • फाइनल में नेपाल पर बड़ी जीत

लगातार जीत की इस श्रृंखला ने भारत को पहले ही संस्करण का अपराजित चैंपियन बना दिया।