फर्जी NUVAMA स्टॉक ब्रोकर के नाम पर उपअभियंता से 9.75 लाख की साइबर ठगी, SEBI जांच में खुला पूरा फर्जीवाड़ा

रायपुर/गोबरा नवापारा। राजधानी में एक बार फिर साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन स्टॉक ट्रेडिंग का झांसा देकर बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम दिया है। इस बार ठगी का शिकार लोक निर्माण विभाग, सेतु उपसंभाग गरियाबंद में पदस्थ उपअभियंता कृष्ण कुमार जगने बने, जिन्होंने फर्जी NUVAMA स्टॉक ब्रोकर के बहकावे में आकर ₹9,75,000 गंवा दिए। पीड़ित ने जब SEBI से सत्यापन करवाया तो पूरा रैकेट फर्जी निकला।


कैसे शुरू हुआ फर्जी NUVAMA स्टॉक ब्रोकर का खेल

पीड़ित के अनुसार, उनके मोबाइल पर 79873-36425 नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को NUVAMA फर्म का SEBI रजिस्टर्ड एडवाइजर बताया और दावा किया कि कंपनी सुरक्षित ट्रेडिंग कर ग्राहकों को अच्छा लाभ देती है।
धीरे-धीरे विश्वास जमाने के बाद पीड़ित को एक ऑनलाइन ट्रेडिंग ग्रुप में जोड़ा गया। यहां 90334-12507 नंबर वाला व्यक्ति ग्रुप एडमिन के रूप में एक्टिव था।

ऑनलाइन चैट में लगातार मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाकर पीड़ित को निवेश के लिए प्रेरित किया गया।


एक महीने में 9.75 लाख रुपये की ठगी

आरोपियों ने 07 सितंबर से 30 सितंबर 2025 के बीच पीड़ित से अलग-अलग खाते और UPI आईडी में रकम जमा करवाने का दबाव बनाया।
इस दौरान भेजी गई रकम इस प्रकार है—

  • MSR74541-8@qkicici – ₹10,000
  • …@ibl – ₹90,000
  • rajaram4441112-1@okaxis – ₹65,000
  • तमिलनाडु मर्चेंट बैंक लिमिटेड – ₹7,20,000

कुल मिलाकर ₹9,75,000 ट्रांसफर किए गए।


‘पेआउट’ के नाम पर फिर मांगा 4.81 लाख का सर्विस चार्ज

राशि जमा होने के बाद स्कैमर्स ने दावा किया कि पीड़ित को भारी मुनाफा हुआ है।
लेकिन पेआउट रिलीज करने के लिए ₹4,81,412 का “सेवा शुल्क” मांगा गया।

जब कृष्ण कुमार जगने ने कहा कि शुल्क लाभ में से काट लें, तो आरोपियों ने धमकी दी कि भुगतान न करने पर कोई पैसा नहीं मिलेगा।
यहीं से पीड़ित को संदेह हुआ और उन्होंने मामला SEBI से सत्यापित किया—जहां पता चला कि पूरा सेटअप फर्जी NUVAMA स्टॉक ब्रोकर गिरोह चला रहा था।


पुलिस में शिकायत, जांच शुरू

पीड़ित उपअभियंता ने गोबरा नवापारा थाने में लिखित शिकायत दी है।
पुलिस अब बैंक खातों, UPI आईडी और मोबाइल नंबरों के आधार पर साइबर ठगों का पता लगा रही है।


साइबर ठगी पर विशेषज्ञों की चेतावनी

  • SEBI रजिस्टर्ड होने का दावा तुरंत न मानें।
  • किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म को SEBI वेबसाइट पर सत्यापित करें
  • UPI या निजी खातों में पैसा ट्रांसफर करने से बचें।
  • बड़े मुनाफे का लालच अक्सर साइबर ठगी का संकेत होता है।