नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2025।
भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया है कि हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में प्रवेश करने वाले हर चीनी जहाज़ पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है। नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वत्सायन ने शुक्रवार को कहा कि भारत किसी भी बाहरी गतिविधि से पूरी तरह अवगत है और नौसेना हर समय “पूर्ण सतर्कता” की स्थिति में है।
उन्होंने कहा, “हमें पता है कि कौन-सा जहाज़ कब आता है, कब जाता है और वे क्या कर रहे हैं। हिंद महासागर भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, और हमारी नज़र हर गतिविधि पर है।”
सितंबर 2025 में चीनी ट्रैकिंग पोत ‘युआन वांग-5’ (Yuan Wang-5) के हिंद महासागर में दिखाई देने की खबरों के बाद से भारतीय नौसेना ने अपने निगरानी मिशनों को और सशक्त किया है। वाइस एडमिरल वत्सायन ने बताया कि इस क्षेत्र में किसी भी समय 40 से 50 विदेशी जहाज़ सक्रिय रहते हैं, और नौसेना उनके हर मूवमेंट को ट्रैक करती है।
उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत निरंतर निगरानी रखती है और जरूरत के अनुसार तैनाती में बदलाव करती है। “हिंद महासागर न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए तेल और व्यापार का मुख्य मार्ग है। ऐसे में यह क्षेत्र पारंपरिक और अप्राकृतिक दोनों तरह की चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है,” उन्होंने कहा।
वत्सायन ने यह जानकारी भी दी कि इस वर्ष 10 युद्धपोत और एक पनडुब्बी नौसेना में शामिल हो चुके हैं, जबकि दिसंबर तक चार और जहाज़ मिलने की उम्मीद है। अगले वर्ष 19 नए पोत नौसेना में शामिल किए जाएंगे, और उसके अगले वर्ष 13 अतिरिक्त पोतों की डिलीवरी प्रस्तावित है।
वाइस एडमिरल वत्सायन नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बोल रहे थे, जो फरवरी 2026 में विशाखापट्टनम में होने वाले तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक आयोजनों —
इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR 2026), एक्सरसाइज मिलन (MILAN 2026) और इंडियन ओशन नेवल सिंपोज़ियम (IONS) कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स — के लिए आयोजित की गई थी।
उन्होंने बताया कि इस बार 55 देशों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है, जिनमें अमेरिका और रूस जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 फरवरी को इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का निरीक्षण करेंगी।
वत्सायन ने कहा, “ये आयोजन भारत के ‘महा सागर विज़न’ (MAHASAGAR Vision) के अनुरूप हैं, जो समावेशी समुद्री विकास और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का प्रतीक है। भारतीय नौसेना न केवल सीमाओं की रक्षा कर रही है, बल्कि वैश्विक समुद्री साझेदारी को भी सशक्त बना रही है।”
