पुरी जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद में ढेंकानाल की सुगंध, अब भगवान को अर्पित होगा जैविक चावल — 1,500 किसानों की मेहनत ने रचा इतिहास

भुवनेश्वर, 11 अक्टूबर 2025 | Odisha News:
Dhenkanal organic rice Jagannath Temple: पुरी जगन्नाथ मंदिर के महाप्रसाद में अब ढेंकानाल जिले की धरा की महक शामिल होने जा रही है। कंकड़ाहाड़ ब्लॉक की 21 पंचायतों में उगने वाला पारंपरिक सुगंधित चावल अब भगवान श्रीजगन्नाथ को अर्पित किया जाएगा।

यह चावल पूरी तरह जैविक खेती (Organic Farming) से तैयार किया जाता है — बिना किसी रासायनिक खाद या कीटनाशक के।


🌾 1,500 किसानों की आस्था और मेहनत का फल:

करीब 1,500 किसान लगभग 1,100 हेक्टेयर भूमि पर इस परंपरागत सुगंधित धान की खेती कर रहे हैं। खेती से लेकर भंडारण तक हर प्रक्रिया में शुद्धता, परंपरा और श्रद्धा का ध्यान रखा जाता है।

इनमें बादशाह भोग, गीतांजलि, केतकीजुहार, काला जीरा, तिलक कस्तूरी और इंद्राणी जैसी विशेष किस्में शामिल हैं। इन किस्मों की खुशबू इतनी गहरी है कि पकने से पहले ही पूरा घर महक उठता है।


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🙏 भगवान जगन्नाथ को अर्पण — किसानों का गर्व:

स्थानीय संगठनों द्वारा इन धानों को किसानों से सीधे खरीदा जाएगा और फिर इन्हें पुरी मंदिर प्रशासन को पहुंचाया जाएगा।
किसानों ने गर्व से कहा —

“हमारी मेहनत का अन्न जब भगवान के थाल में पहुंचेगा, उससे बड़ा आशीर्वाद कोई नहीं।”

इस पहल से न केवल किसानों की आमदनी में वृद्धि हुई है, बल्कि उनकी आस्था को भी नई दिशा मिली है।


🌍 विदेशों तक पहुंची सुगंध:

बीते वर्ष जहां यह धान 700 हेक्टेयर में उगाई गई थी, वहीं इस साल इसका विस्तार बढ़कर 1,100 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
वर्तमान में इसकी कीमत ₹4,100 प्रति क्विंटल है। मांग इतनी अधिक है कि इसकी सुगंध दुबई तक पहुंच चुकी है।


🌱 सरकार का सहयोग मिले, तो बन सकता है वैश्विक ब्रांड:

किसानों का कहना है कि यदि सरकार इस पहल को प्रोत्साहन और मार्केटिंग सहयोग दे, तो “जगन्नाथ महाप्रसाद चावल” को वैश्विक जैविक ब्रांड के रूप में स्थापित किया जा सकता है।


किसानों के चेहरे पर अब गर्व और संतोष दोनों झलकता है। एक बुजुर्ग किसान ने कहा —

“पहले हमारी मेहनत सिर्फ बाजार तक थी, अब हमारी फसल भगवान के चरणों तक पहुंच रही है। यही सच्ची सफलता है।”