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छत्तीसगढ़ में गौधाम की घोषणा के बाद भी सड़कों पर बेसहारा गौवंश, बढ़ रहा हादसों का खतरा

रायपुर, 31 अगस्त 2025।
भारत में प्राचीन मान्यता है कि गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। यही कारण है कि हर सरकार गौवंश की सेवा और संरक्षण के नाम पर योजनाएं घोषित करती रही है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासनकाल में गोठान योजना लाई गई थी, लेकिन इसका लाभ गौमाता और गौवंश तक नहीं पहुंच पाया। योजना भ्रष्टाचार और घोटालों की भेंट चढ़ गई और गौवंश को गोठान के बजाय सड़कों का सहारा लेना पड़ा।

इसके बाद सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार ने गौधाम की घोषणा की। लेकिन लगभग 21 महीनों के बीत जाने के बाद भी सड़क पर बैठे गौवंश को किसी सुरक्षित गौधाम में जगह नहीं मिल सकी। राजधानी रायपुर से लेकर छोटे कस्बों और गांवों तक सड़कों पर गौवंश का झुंड आम दृश्य बन चुका है।

सड़कों पर बैठे ये बेसहारा मवेशी न केवल यातायात में बाधा बन रहे हैं, बल्कि रोजाना कई वाहन चालकों और खुद जानवरों को दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी इन दृश्यों को देखते हैं, लेकिन जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है। लोगों ने सुझाव दिया “सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं का बड़ा कारण यही गौवंश हैं। सरकार को चाहिए कि या तो गौधामों को तत्काल चालू करे या फिर रात्रि के समय यातायात पर आंशिक रोक लगाए ताकि इंसान और गौवंश दोनों सुरक्षित रह सकें,”

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि भारत में लॉ ऑफ टॉर्ट (Law of Torts) के तहत विभागों पर मुकदमा लगना शुरू हो जाए, तो दुर्घटनाओं में घायल लोगों और परिवारों को मुआवजा देना पड़ेगा, जिससे सरकारी खजाना खाली हो जाएगा। फिलहाल यह कानून पूरी तरह लागू नहीं है और इसका खामियाजा आमजन भुगत रहे हैं।

यह मुद्दा अब राजनीतिक वादों से आगे बढ़कर जनसुरक्षा का प्रश्न बन गया है। सवाल यह है कि कब तक गौमाता और आमजन दोनों सड़क पर अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे।