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नेत्रदान और देहदान से रोशन किए दो जीवन: श्री प्रकाश सकलेचा ने जाते-जाते दिया मानवता का संदेश

दुर्ग, 7 अगस्त 2025।
आपापुरा दुर्ग निवासी श्री प्रकाश सकलेचा के निधन के बाद उनके परिजनों ने एक प्रेरणादायी निर्णय लेते हुए नेत्रदान और देहदान किया, जिससे दो नेत्रहीनों को नई रोशनी मिलेगी और मेडिकल छात्रों को अध्ययन के लिए देह का उपयोग हो सकेगा। यह कदम समाज में मानवता, सेवा और जागरूकता का अद्भुत उदाहरण बन गया है।

उनके परिजनों — भाई श्री डोंगरमल जी सकलेचा, श्री सुरेश कुमार सकलेचा, पुत्र डॉ. विकास सकलेचा, किशोर सकलेचा, विनय सकलेचा और बहुएं डॉ. सोनम, स्वाति एवं प्रिया जैन — ने मिलकर यह पुनीत निर्णय लिया। नेत्रदान की प्रक्रिया नवदृष्टि फाउंडेशन के राज आढ़तिया, रितेश जैन, प्रभुदयाल उजाला, अतुल जैन, राजा नाहटा और राजेश पारख के सहयोग से सम्पन्न हुई।

इसके पश्चात सकलेचा परिवार ने देहदान का निर्णय भी लिया और श्री चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज को पार्थिव शरीर सुपुर्द कर दिया।
श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज जुनवानी के संदीप बाचकर और नेत्र सहायक विवेक कसार ने नेत्रदान प्रक्रिया को पूर्ण किया।

इस अवसर पर डॉ. विकास सकलेचा ने कहा:
“आज बाबूजी के जाने का दुख पूरे परिवार को है, परंतु उनके नेत्रदान और देहदान से जो दूसरों को जीवन और दृष्टि मिली है, वह हमें शक्ति और संतोष दे रही है। चूंकि मैं स्वयं डॉक्टर हूं, इसलिए इसके महत्व को भलीभांति समझता हूं। यह निर्णय समाज में सकारात्मक प्रभाव डालेगा।”

राजेश पारख ने कहा:
“श्री प्रकाश सकलेचा के निधन के बावजूद परिवार द्वारा नेत्रदान का निर्णय लेना मानवता के लिए प्रेरणा है। इससे समाज में नेत्रदान के प्रति चेतना जागेगी।”

नवदृष्टि फाउंडेशन के सत्येंद्र राजपूत ने कहा:
“हमारी संस्था लगातार देहदान, नेत्रदान व त्वचादान के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है और अब लोग स्वप्रेरणा से आगे आ रहे हैं। जो भी व्यक्ति सहयोग चाहता है, वह 9826156000 या 9827190500 पर संपर्क कर सकता है।”

नवदृष्टि फाउंडेशन की ओर से अनिल बल्लेवार, कुलवंत भाटिया, प्रवीण तिवारी, हरमन दुलई, जितेंद्र हासवानी, सत्येंद्र राजपूत, पीयूष मालवीय, प्रभुदयाल उजाला, विकास जायसवाल, मोहित अग्रवाल, राकेश जैन सहित कई सदस्यों ने श्री प्रकाश सकलेचा को श्रद्धांजलि अर्पित की और सकलेचा परिवार के निर्णय को मानवता की मिसाल बताया।