रायपुर, 24 जुलाई 2025:
छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में पहली बार मंत्री पदों की संख्या बढ़ाई जा रही है। सरकार द्वारा हरियाणा मॉडल को आधार बनाकर कैबिनेट विस्तार की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस फैसले से छत्तीसगढ़ में तीन नए मंत्री शामिल किए जाएंगे, जिससे वर्तमान मंत्रिमंडल को नई ऊर्जा और क्षेत्रीय संतुलन मिलने की उम्मीद है।
हरियाणा फॉर्मूला क्या है?
भारत के संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के तहत किसी भी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सीटों के 15% से अधिक नहीं हो सकती।
छत्तीसगढ़ और हरियाणा, दोनों राज्यों में 90 विधानसभा सीटें हैं। 90 का 15% होता है 13.5, जिसे पूरा करके 14 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
हरियाणा पहले ही इस फॉर्मूले के तहत 14 मंत्रियों वाला मंत्रिमंडल बना चुका है। अब छत्तीसगढ़ सरकार भी यही फॉर्मूला लागू करने जा रही है।
कैबिनेट विस्तार को लेकर संगठन और सरकार में बनी सहमति
हाल ही में मैनपाट में आयोजित भाजपा के सत्ता और संगठन शिविर में मंत्रिमंडल विस्तार पर गहन मंथन हुआ। सूत्रों के अनुसार, इसके बाद रायपुर में भी संगठन की बैठक हुई, जिसमें केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद यह तय हुआ कि अगले 10 से 15 दिनों के भीतर विस्तार हो सकता है।
छत्तीसगढ़ को मिलेंगे तीन नए मंत्री
वर्तमान में राज्य मंत्रिमंडल में 13 मंत्री हैं।
- एक पद बृजमोहन अग्रवाल के इस्तीफे के बाद रिक्त हुआ।
- दूसरा पद अब तक भरा नहीं गया था।
- और अब हरियाणा मॉडल के तहत एक नया मंत्री पद जोड़ा जाएगा।
इस तरह कुल 3 नए मंत्री राज्य को मिलेंगे, जिससे मंत्रिपरिषद की संख्या 14 हो जाएगी।
क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण को मिलेगी प्राथमिकता
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो सरगुजा संभाग से पहले ही मुख्यमंत्री समेत 3 मंत्री हैं, इसलिए बिलासपुर, बस्तर, रायपुर और दुर्ग संभाग को प्राथमिकता दी जाएगी।
जातीय समीकरण में
- एक सामान्य वर्ग से (संभावित बनिया समुदाय)
- एक ओबीसी वर्ग से
- एक अनुसूचित जनजाति वर्ग से
विधायक को मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है।
साथ ही संगठन नई पीढ़ी और नए चेहरों को कैबिनेट में मौका देने पर विचार कर रहा है।
राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश
इस कैबिनेट विस्तार को केवल संख्या में वृद्धि नहीं बल्कि राजनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय संतुष्टि का माध्यम माना जा रहा है। बीजेपी चाहती है कि आगामी योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन और प्रशासनिक मजबूती के लिए अनुभवी और संतुलित चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए।
📌 निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ में पहली बार मंत्रियों की संख्या बढ़ाकर 14 की जाएगी, जो न केवल एक संवैधानिक रूप से उचित कदम है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस कैबिनेट विस्तार से भाजपा सरकार को आगामी कार्यकाल में सशक्त, समन्वित और व्यापक प्रतिनिधित्व वाली टीम तैयार करने का अवसर मिलेगा।
