नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाले में आरोपी निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू को अंतरिम जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति सूर्य कांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही इस मामले के प्रमुख आरोपी व्यवसायी सूर्यकांत तिवारी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के उप सचिव सौम्या चौरसिया को भी अंतरिम जमानत दी गई है।
जांच लंबी चलेगी, जल्दबाजी नहीं होगी: सुप्रीम कोर्ट
न्यायमूर्ति सूर्य कांत ने कहा, “जांच की लंबी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए और किसी जल्दबाजी से बचते हुए, हमें याचिकाकर्ताओं को अंतरिम जमानत देना उचित लगता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी गवाहों को प्रभावित करने, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने या जांच में बाधा डालने का प्रयास करते हैं, तो सरकार अदालत का रुख कर सकती है और उनकी जमानत रद्द कर दी जाएगी।

रानू साहू और सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी
रानू साहू, जो 2010 बैच की आईएएस अधिकारी हैं, को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2023 में गिरफ्तार किया था। वहीं, सौम्या चौरसिया को 2022 में गिरफ्तार किया गया था। साहू को गिरफ्तार किए जाने से पहले वह राज्य कृषि विभाग की निदेशक के रूप में कार्यरत थीं।
क्या है छत्तीसगढ़ कोल लेवी घोटाला?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के अनुसार, एक संगठित गिरोह ने छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन से अवैध रूप से पैसा वसूला। जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच प्रति टन कोयले पर ₹25 की अवैध वसूली की गई।
540 करोड़ रुपये की अवैध उगाही
ईडी के मुताबिक, इस अवधि में कुल 540 करोड़ रुपये की अवैध उगाही हुई, जिसका इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देने, चुनावों में खर्च करने और संपत्तियां खरीदने में किया गया। अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 26 आरोपियों के खिलाफ तीन अभियोजन शिकायतें दर्ज की गई हैं। साथ ही 270 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त किया गया है।
आगे की जांच जारी
प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में और भी खुलासे कर सकता है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अगर आरोपी जांच में बाधा डालते हैं तो उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।
